
नई दिल्ली: ग्वालियर की रहने वाली सीमा बंसल की कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों के आगे हार मान लेते हैं। आज उनकी कंपनी DCG Tech Limited पैकेजिंग इंडस्ट्री में एक जाना-पहचाना नाम है, लेकिन शुरुआत बहुत ही साधारण और कठिन परिस्थितियों में हुई थी।
सीमा बताती हैं, “मेरे पिता का देहांत तब हो गया जब मैं डेढ़ साल की थी। हमारे हालात इतने खराब थे कि मेरी मां के पास मेरे पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए भी पैसे नहीं थे। घर में सिर्फ एक सीलिंग फैन था, जिसे उन्होंने 170 रुपये में बेच दिया और उसी पैसे से अंतिम संस्कार किया।”
मुश्किलों से भरा बचपन
पिता के निधन के बाद उनकी मां ने अकेले ही चार बच्चों को पाला। संगीत सिखाकर वे बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकालती थीं। बाद में सीमा को सरकारी स्कूल में डालना पड़ा, जहां शुरू में उन्हें दोस्त नहीं मिले और छह महीने स्कूल नहीं जा पाईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी क्लास में टॉप किया।
मुंबई और लंदन में संघर्ष
सीमा और उनके भाई मुंबई आ गए, जहां शुरुआत में उन्हें ठहरने और काम दोनों के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने छोटे-मोटे काम किए और फिर एक IT कंपनी में नौकरी पाई। इसके बाद उन्हें लंदन ऑफिस में काम करने का मौका मिला। वहां उन्होंने न केवल अनुभव और अवसर पाए, बल्कि अपना जीवनसाथी भी खोजा।
व्यापार की नई शुरुआत – DCG Packs
लंदन और अमेरिका में मिली अनुभव और अवसरों के बाद, सीमा और उनके परिवार को बड़ा नुकसान हुआ। वापस भारत लौटने के बाद उन्होंने पैकेजिंग बिजनेस शुरू किया। बिना किसी अनुभव के, सीमा ने DCG Packs की स्थापना की। शुरुआत में वह गाड़ी चलाती थीं, सामान बेचती थीं, हिसाब-किताब रखती थीं और खुद ही मैनेजर भी थीं।
कड़ी मेहनत का फल
आज DCG Tech Limited का कारोबार भारत और UAE में फैला है। 50,000 से अधिक ग्राहक कंपनी के टिकाऊ और तकनीकी पैकेजिंग सॉल्यूशंस का उपयोग कर रहे हैं। छोटी शुरुआत से 157 करोड़ रुपये की कंपनी बनाने में सीमा की लगन और साहस ही उनकी सफलता का रहस्य है।
सीमा बंसल की कहानी यह संदेश देती है कि हौसला और मेहनत किसी भी मुश्किल को पार कर सकती है, और किसी भी परिस्थिति में आत्मविश्वास बनाए रखना सफलता की कुंजी है।