
डेनमार्क, 22 जनवरी: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच बढ़ते विवाद का असर अब आम जनता तक पहुँच गया है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोग सड़कों पर विरोध करने की बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं। वहां ऐप स्टोर पर अचानक एंटी-अमेरिका मोबाइल ऐप्स की मांग बढ़ गई है।
डेनमार्क में बढ़ा ‘एंटी-US’ ऐप का क्रेज
ऐसे ही दो ऐप्स, ‘NonUSA (UdenUSA)’ और ‘Made O’Meter’, डेनमार्क में अचानक पॉपुलर हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, NonUSA ऐप 9 जनवरी को 441वें स्थान पर था, लेकिन कुछ ही दिनों में यह नंबर-1 ऐप बन गया। वहीं, Made O’Meter ऐप चार्ट में चौथे स्थान पर पहुंचा। ये ऐप्स अमेरिकी प्रोडक्ट्स की पहचान कर उनके बहिष्कार में मदद करते हैं।
एंटी-US ऐप्स कैसे काम करते हैं?
इन ऐप्स की खासियत है कि वे बारकोड स्कैन करके बताते हैं कि कोई प्रोडक्ट अमेरिकी है या नहीं। Made O’Meter ऐप ग्रोसरी शॉपिंग के दौरान सप्लाई चेन और मूल कंपनी की जानकारी भी उपलब्ध कराता है। इन ऐप्स का उद्देश्य अमेरिकी प्रोडक्ट्स को पहचानकर उनका बहिष्कार करना है।
ग्रीनलैंड विवाद और डिजिटल प्रतिरोध
ट्रंप के ग्रीनलैंड पर दावे ने डेनमार्क के लोगों में गुस्सा बढ़ा दिया है। इस गुस्से के चलते लोग अमेरिका के प्रोडक्ट्स से दूरी बना रहे हैं। टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ इसे एक बड़े डिजिटल विरोध के रूप में देख रहे हैं, जहां ग्राहक अपने चयनित प्रोडक्ट्स के जरिए सरकारों और कंपनियों को संदेश भेज रहे हैं।
विरोध में अमेरिकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
दिलचस्प यह है कि लोग अमेरिका के iPhone और ऐप स्टोर का इस्तेमाल करके अमेरिका के ही प्रोडक्ट्स का विरोध कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूक ग्राहक अपनी खरीदारी की शक्ति से राजनीतिक और आर्थिक फैसलों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
इस प्रकार, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की जनता ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिका के खिलाफ एक नया विरोध स्वरूप तैयार कर लिया है।