
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य की जेलों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद मध्य प्रदेश देश का तीसरा ऐसा राज्य है, जहां जेलों में सबसे अधिक कैदी बंद हैं। वर्तमान में प्रदेश की 132 जेलों में कुल 45,543 कैदी निरुद्ध हैं, जबकि जेलों की क्षमता इससे कहीं कम है।
रविवार को जारी एक बयान में कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता उमंग सिंघार ने बताया कि जेलों में बंद कैदियों में बड़ी संख्या विचाराधीन कैदियों की है। उन्होंने कहा कि कुल विचाराधीन कैदियों में से करीब 21 प्रतिशत आदिवासी समुदाय से आते हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
जेलें क्षमता से 152 प्रतिशत तक भरीं
सिंघार ने बताया कि प्रदेश की जेलों में लगभग 30 हजार कैदियों को रखने की व्यवस्था है, लेकिन वर्तमान में कैदियों की संख्या क्षमता से 152 प्रतिशत अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कुल कैदियों में लगभग 50 प्रतिशत विचाराधीन हैं, जिनके खिलाफ या तो आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं या जिनके मामलों की सुनवाई अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
आदिवासी आबादी के अनुपात में अधिक कैद
उन्होंने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में 1.53 करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं, जो राज्य की कुल आबादी का 21.08 प्रतिशत हैं। इसके बावजूद जेलों में विचाराधीन आदिवासियों की हिस्सेदारी इसी अनुपात में होना इस बात का संकेत है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग न्यायिक प्रक्रिया में सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया, गरीबी और जमानत की राशि जुटा न पाने के कारण हजारों लोग वर्षों तक जेल में बंद रहने को मजबूर हैं। उन्होंने हालिया उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि बिना दोष सिद्ध हुए किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21—जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार—का उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोषी कैदियों की बात करें तो प्रदेश में लगभग 22 हजार कैदी सजा काट रहे हैं, जिनमें से करीब 50 प्रतिशत आदिवासी और दलित समुदाय से हैं।
शीघ्र सुनवाई और जमानत प्रक्रिया सरल करने की मांग
इन आंकड़ों को “बेहद चिंताजनक” बताते हुए उमंग सिंघार ने सरकार और न्यायपालिका से विचाराधीन कैदियों की शीघ्र सुनवाई, जमानत प्रक्रिया को सरल बनाने और जेल सुधारों पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि समय पर न्याय और मानवीय दृष्टिकोण ही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान है।