
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राज्य में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरी तरह मुफ्त होगा। इस गंभीर अनुवांशिक बीमारी के इलाज पर 15 से 30 लाख रुपए तक खर्च आने वाला था, जिसे अब सरकार खुद उठाएगी।
राज्य सरकार ने इसके लिए मेदांता फाउंडेशन, नई दिल्ली के साथ समझौता किया है। पहले चरण में इंदौर, उज्जैन और देवास के जिलों के मरीजों को कवर किया जाएगा।
12 साल से कम उम्र के बच्चों को मिलेगा लाभ
योजना के अंतर्गत लाभ लेने के लिए मरीज की आयु 12 वर्ष या उससे कम और परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम होनी चाहिए। साथ ही, भाई या बहन का 100% HLA मैच होना आवश्यक है। सरकार न केवल ट्रांसप्लांट का खर्च उठाएगी, बल्कि मरीज और उनके परिजनों के दिल्ली आने-जाने, रहने और खाने की पूरी व्यवस्था भी मुफ्त करेगी।
मध्य प्रदेश में वर्तमान में थैलेसीमिया के लगभग 2 हजार पंजीकृत मामले हैं, जिनमें से करीब 1,800 मरीज नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही इस बीमारी का एकमात्र स्थायी इलाज है।
एनएचएम की मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि सरकार जिलेवार डेटा जुटा रही है, ताकि हर बच्चे की सटीक स्थिति का पता लगाया जा सके। इस पहल से अब हजारों बच्चों को सामान्य जीवन जीने और स्वस्थ भविष्य की नई उम्मीद मिली है।
थैलेसीमिया क्या है?
थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रक्त रोग है, जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके कारण लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी नष्ट होती हैं और गंभीर एनीमिया की स्थिति बन जाती है। गंभीर मरीजों को जीवित रहने के लिए नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट से इस बीमारी से स्थायी बचाव संभव है।