
पटना: बिहार के मधेपुरा जिले में नाबालिग छात्र की गिरफ्तारी और दो महीने से अधिक समय तक जेल में रखे जाने के मामले में पटना हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक करार देते हुए राज्य सरकार को नाबालिग को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रितेश कुमार की खंडपीठ ने नाबालिग के परिजनों की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर की। पीठ ने कहा, “हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यह अवैध गिरफ्तारी का मामला है। ऐसी परिस्थिति में, एक संवैधानिक न्यायालय होने के नाते, हम मूकदर्शक नहीं रह सकते।”
मजिस्ट्रेट और पुलिस पर सवाल
कोर्ट ने मधेपुरा पुलिस और संबंधित मजिस्ट्रेट दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए। बेंच ने कहा कि मजिस्ट्रेट भी नाबालिग की स्वतंत्रता की रक्षा करने में विफल रहे, जिससे किशोर को ढाई महीने से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा।
मुआवजा दोषी अधिकारियों की जेब से वसूला जाएगा
पटना हाई कोर्ट ने नाबालिग की गैर-कानूनी गिरफ्तारी और हिरासत को देखते हुए आदेश दिया कि 5 लाख रुपये का मुआवजा राज्य सरकार दे, लेकिन यह राशि दोषी अधिकारियों से वसूली जाएगी। इसके अलावा, अदालत ने पीड़ित परिवार को मुकदमे में खर्च हुए 15,000 रुपये भी अलग से देने का निर्देश दिया और यह वसूली 6 महीने के भीतर पूरी करने को कहा।
पुलिस महानिदेशक को जांच का आदेश
अदालत ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी निर्देश दिया कि इस मामले की प्रशासनिक जांच कराएं और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
निष्कर्षतः, पटना हाई कोर्ट ने नाबालिग की गिरफ्तारी के इस मामले में साफ संदेश दिया है कि कानून की उपेक्षा और शक्ति का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।