
ईरान में सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर चल रहे हिंसक प्रदर्शनों के बीच, वहां के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के अगले हफ्ते दिल्ली आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, अराघची 15-16 जनवरी को भारत आएंगे। यह उनके लिए दूसरी भारत यात्रा होगी; पहली यात्रा मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई थी।
हालांकि, पश्चिम एशिया में राजनीतिक और कूटनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच उनकी यात्रा की अहमियत और बढ़ जाती है।
यात्रा का संभावित एजेंडा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा की तैयारियाँ अभी अंतिम रूप में नहीं हैं। लेकिन दोनों पक्षों के सूत्रों ने बताया कि यात्रा के मुख्य एजेंडे में शामिल हो सकते हैं:
चाबहार पोर्ट का विकास और सामरिक प्लेटफॉर्म की मजबूती
रीजनल कनेक्टिविटी और ट्रेड व रीजनल डेवलपमेंट में सहयोग बढ़ाना
गाजा में शांति प्रक्रिया पर चर्चा
ईरान में हाल की हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षा स्थिति पर जानकारी साझा करना
चाबहार पोर्ट का महत्व
ईरान के चाबहार पोर्ट पर भारत को अक्टूबर 2025 में छह महीने की रियायत दी गई थी, ताकि सामरिक और आर्थिक गतिविधियाँ जारी रखी जा सकें। यह बंदरगाह अब अफगानिस्तान से भारत आने वाले माल के लिए भी महत्वपूर्ण ठिकाना बन गया है, खासकर तब जब पाकिस्तान वाला ट्रांजिट रूट बंद है।
हिंसक प्रदर्शनों के बीच यात्रा का महत्व
ईरान में आर्थिक और राजनीतिक कारणों से शुरू हुए प्रदर्शन अब हिंसक हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन झड़पों में अब तक कम से कम 35 लोग मारे गए हैं, जिनमें सुरक्षा बल के सदस्य भी शामिल हैं। इस उथल-पुथल के बीच अराघची की यात्रा भारत से परामर्श और सहयोग का अवसर भी बन सकती है।
भारत की ग्लोबल साउथ में भूमिका
भारत इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के भी भारत आने की संभावना है। ईरान पहले ही कह चुका है कि भारत न सिर्फ वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज भी बन रहा है। अराघची की यात्रा को इन वैश्विक पहलुओं और क्षेत्रीय स्थायित्व के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।