Wednesday, January 7

उमर खालिद को जमानत न मिलने पर सियासी घमासान, प्रियांक खरगे का तीखा तंज—“रेपिस्ट को बेल, आवाज उठाने वालों को जेल”

 

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दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत न मिलने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रियांक खरगे ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

 

प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “विकसित भारत में स्वागत है, जहां अपनी आवाज उठाने वालों को जेल में डाल दिया जाता है और रेपिस्ट को जमानत दे दी जाती है।” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे ने आगे आरोप लगाया कि देश में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कुछ चर्चित नामों का जिक्र करते हुए लिखा कि “कुलदीप सिंह सेंगर, आसाराम बापू, गुरमीत राम रहीम सिंह और बृज भूषण शरण सिंह को जमानत, जबकि उमर खालिद, सोनम वांगचुक, सागर गोरखे और रमेश गाइचोर को जेल।”

 

बीजेपी का पलटवार

 

प्रियांक खरगे के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को सिर्फ कांग्रेस और उसके “इकोसिस्टम” से ही सहानुभूति नहीं मिल रही थी, बल्कि विदेशों से भी उनके समर्थन में पत्र लिखे जा रहे थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली को जलाने और आतंकवाद से जुड़े आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रतीत होते हैं।

 

बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के “मुंह पर तमाचा” है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तथाकथित “टुकड़े-टुकड़े गैंग” का समर्थन किया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने कहा कि यूएपीए के तहत दोनों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है और इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।

 

हालांकि, इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है।

 

सियासत और न्याय पर बहस तेज

 

उमर खालिद की जमानत खारिज होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी और न्याय व्यवस्था से जोड़कर देख रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मामला बता रही है।

 

स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक मोर्चे पर भी नई बहस को जन्म दे दिया है।

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