वेटलिफ्टिंग में भारत का डंका बजाने वालीं Mirabai Chanu पेरिस में पदक का रंग बदलने को बेताब


टोक्यो ओलंपिक 2020 में रजत पदक से संतोष करने वाली मीराबाई चानू पेरिस में होने जा रहे ओलंपिक खेलों में इस बार स्वर्ण पदक जीतने को बेताब हैं। विश्व चैंपियन और राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण व एक रजत पदक हासिल करने वाली मीराबाई चानू भारत की बेहतरीन वेटलिफ्टर्स की सूची में शामिल हैं। कर्णम मल्लेश्वरी के बाद टोक्यो 2020 में मीराबाई का रजत पदक भारतीय वेटलिफ्टर द्वारा जीता गया दूसरा ओलंपिक पदक था। वह पीवी सिंधु के बाद ओलंपिक रजत पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला भी बनीं। उन्होंने अपने पहले ओलंपिक के रियो 2016 में अपने प्रदर्शन से प्रतिद्वंदियों के छक्के छुड़ा दिए थे। जहां उन्होंने 12 साल के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद प्रवेश किया था।

चानू मीराबाई का जन्म 8 अगस्त 1994 को इम्फाल के पास हुआ था। उनके परिवार ने 12 साल की उम्र से ही उनके वेटलिफ्टर बनने के सपने का समर्थन किया। परिवार ने उनकी ताकत तब पहचानी जब वह लकड़ी के लट्ठे उठाने में सक्षम थीं जिन्हें उनके भाई को उठाने में मुश्किल होती थी और आसानी से घर वापस आ जाती थीं। उन्हें परिवार में हैवीवेट लिफ्टर के रूप में जाना जाता था। हमेशा से खेलों में दिलचस्पी रखने वाली मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग को चुनने से पहले करियर की शुरुआत में इंफाल के एक स्थानीय स्पोर्ट्स हॉल में तीरंदाज़ी करना सीखना चाहती थीं। अपने खेल की सही पहचान के बाद मीराबाई चानू ने भारत की महिला भारोत्तोलक कुंजारानी देवी से प्रेरणा लेकर उनके पथ पर चलने की ठान ली। 

स्कॉटलैंड में हुए 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर मिराबाई चानू ने 20 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद, यूएसए के अनाहेम में 2017 विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में मीराबाई चानू ने दो दशकों बाद गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया और वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बन गईं। सिडनी 2000 की कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी की खिताबी जीत के बाद 1994 और 1995 के बाद 48 किग्रा वर्ग में उनका यह पहला प्रयास था। इसके बाद उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया। साथ ही इस इवेंट में उन्होंने ‘स्नैच’, क्लीन एंड जर्क’ के अलावा ‘टोटल’ में भी रिकॉर्ड दर्ज किया। लेकिन पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट ने उनके इस शानदार सीज़न पर विराम लगा दिया। इसकी वजह से चानू 2018 के एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में नहीं शामिल हो पाईं। और फिर चोट से उबरने में उन्हें करीब एक साल लग गया। 

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इसके बाद 2019 में चानू थाईलैंड में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने के लिए वापसी की, जहां वह चौथे स्थान पर रहीं। लेकिन पटाया के इस इवेंट में उनका प्रदर्शन फिर भी यादगार बन गया, क्योंकि वह अपने करियर में पहली बार 200 किग्रा भार उठाने में सफल रहीं। अप्रैल में ताशकंद में 2021 एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप में मीराबाई चानू ने 119 किग्रा भार उठाकर क्लीन एंड जर्क में एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि ने उन्हें टोक्यो ओलंपिक के लिए पूरी तरह से तैयार कर दिया, जहां उन्होंने रजत पदक जीतने के लिए 202 किग्रा (87 किग्रा स्नैच + 115 किग्रा क्लीन एंड जर्क) का भार उठाया। 

एक साल बाद, मीराबाई चानू ने बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में सबकी पसंदीदा एथलीट के रूप में प्रवेश किया। यहां उन्होंने 201 किग्रा (स्नैच – 88 किग्रा; क्लीन एंड जर्क – 113 किग्रा) का भार उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। अपने इस प्रयास के साथ ही, मीराबाई चानू ने गोल्ड कोस्ट 2018 में अपने द्वारा निर्धारित श्रेणी में 191 किग्रा के पिछले राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इसी साल विश्व चैंपियनशिप में मीराबाई चानू कलाई की चोट से जूझ रही थीं और उन्होंने 200 किग्रा (87 किग्रा स्नैच +113 किग्रा (क्लीन एंड जर्क) के कुल भार के साथ रजत पदक अपने नाम किया। हालांकि, मीराबाई चानू पूरी तरह से फिट नहीं थीं, उन्होंने हांगझोऊ में 2023 एशियन गेम्स में हिस्सा लिया, लेकिन 191 किग्रा के संयुक्त भार के साथ चौथे स्थान पर रहीं।



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