Thursday, April 9

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अमेरिका का ‘स्वदेशी’ इलाज करने जा रहा भारत, CEA ने ट्रंप को दी कड़वी सलाह
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अमेरिका का ‘स्वदेशी’ इलाज करने जा रहा भारत, CEA ने ट्रंप को दी कड़वी सलाह

    नई दिल्ली: अमेरिका की टैरिफ धमकियों और वैश्विक सप्लाई चेन के दबावों के बीच भारत अब आत्मनिर्भर और स्वदेशी उत्पादों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने 5 प्रमुख स्वदेशी क्लस्टरों के विकास की योजना बनाई है, ताकि देश की रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो।   नागेश्वरन ने कहा कि वैश्विक व्यापार अब आपसी भरोसे पर आधारित नहीं रहा। अमेरिका के टैरिफ, चीन की एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग और यूरोपीय यूनियन के कार्बन सीमा उपाय जैसे कदम भारत के लिए गंभीर चुनौती हैं। ऐसे में स्वदेशीकरण को ‘पॉलिसी इंस्ट्रूमेंट’ के रूप में अपनाना जरूरी है।   स्वदेशीकरण के पांच प्रमुख क्लस्टर इनमें सेमीकंडक्टर्स और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्रमुख हैं, जहां भारत को रणनीतिक अंतराल को भरने की आवश्यकता है। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पावर इलेक्ट्...
बिलकुल! आपके दिए लेख को समाचार पत्र शैली में प्रवासी (प्रकाशनीय) रूप में इस तरह लिखा जा सकता है:  —  **उपसभापति क्यों नहीं कर सकते राज्यसभा के सभापति के कार्य? SC ने पूछा सवाल** *अभिषेक पाण्डेय, नवभारत टाइम्स, 9 जनवरी 2026*  नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार जांच कर रहे संसदीय पैनल की वैधता को चुनौती दी थी।  जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति उनके कार्य कर सकते हैं, तो राज्यसभा के सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति उनके कार्य क्यों नहीं कर सकते।  जस्टिस वर्मा की ओर से मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि न्यायाधीश (जांच) अधिनियम केवल लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार देता है। उपसभापति को यह अधिकार नहीं है। हालांकि, उपसभापति सामान्य कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं।  कोर्ट ने अधिनियम की परिभाषा संबंधी धाराओं पर गौर करते हुए कहा कि ‘जब तक संदर्भ अन्यथा न हो’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे उपसभापति की भूमिका पर बहस खुली रहती है।  **जस्टिस वर्मा केस का विवरण** 14-15 मार्च 2025 की रात दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में आग लगने के दौरान फायर सर्विस ने स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां बरामद की थीं। उस समय जस्टिस वर्मा बंगले में नहीं थे। जांच में यह कैश अनएकाउंटेड पाया गया।  इस घटना के एक हफ्ते बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया गया, जहां फिलहाल कोई न्यायिक कार्य उन्हें सौंपा नहीं गया है।  —  अगर चाहो, मैं इसे **और भी समाचार पत्र के हेडलाइन-फोकस्ड और संक्षिप्त संस्करण** में बदल सकता हूँ, जो पेज पर अधिक आकर्षक लगे। क्या मैं वह भी तैयार कर दूँ?
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बिलकुल! आपके दिए लेख को समाचार पत्र शैली में प्रवासी (प्रकाशनीय) रूप में इस तरह लिखा जा सकता है: — **उपसभापति क्यों नहीं कर सकते राज्यसभा के सभापति के कार्य? SC ने पूछा सवाल** *अभिषेक पाण्डेय, नवभारत टाइम्स, 9 जनवरी 2026* नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार जांच कर रहे संसदीय पैनल की वैधता को चुनौती दी थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति उनके कार्य कर सकते हैं, तो राज्यसभा के सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति उनके कार्य क्यों नहीं कर सकते। जस्टिस वर्मा की ओर से मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि न्यायाधीश (जांच) अधिनियम केवल लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार देता है। उपसभापति को यह अधिकार नहीं है। हालांकि, उपसभापति सामान्य कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं। कोर्ट ने अधिनियम की परिभाषा संबंधी धाराओं पर गौर करते हुए कहा कि ‘जब तक संदर्भ अन्यथा न हो’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे उपसभापति की भूमिका पर बहस खुली रहती है। **जस्टिस वर्मा केस का विवरण** 14-15 मार्च 2025 की रात दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में आग लगने के दौरान फायर सर्विस ने स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां बरामद की थीं। उस समय जस्टिस वर्मा बंगले में नहीं थे। जांच में यह कैश अनएकाउंटेड पाया गया। इस घटना के एक हफ्ते बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया गया, जहां फिलहाल कोई न्यायिक कार्य उन्हें सौंपा नहीं गया है। — अगर चाहो, मैं इसे **और भी समाचार पत्र के हेडलाइन-फोकस्ड और संक्षिप्त संस्करण** में बदल सकता हूँ, जो पेज पर अधिक आकर्षक लगे। क्या मैं वह भी तैयार कर दूँ?

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार जांच कर रहे संसदीय पैनल की वैधता को चुनौती दी थी।   जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति उनके कार्य कर सकते हैं, तो राज्यसभा के सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति उनके कार्य क्यों नहीं कर सकते।   जस्टिस वर्मा की ओर से मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि न्यायाधीश (जांच) अधिनियम केवल लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार देता है। उपसभापति को यह अधिकार नहीं है। हालांकि, उपसभापति सामान्य कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं।   कोर्ट ने अधिनियम की परिभाषा संबंधी धाराओं पर गौर करते हुए कहा कि 'जब तक संदर्भ अन्यथा न हो' जैसे शब...
सभी को AI की जरूरत? Grok ने दिखाई तकनीक का खतरनाक पक्ष
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सभी को AI की जरूरत? Grok ने दिखाई तकनीक का खतरनाक पक्ष

    हाल ही में X (पूर्व में ट्विटर) के AI, Grok ने तस्वीरों से कपड़े हटाने की क्षमता दिखाई, जिससे AI के दुरुपयोग का गंभीर खतरा उजागर हुआ। यह घटना दर्शाती है कि AI को अत्यधिक सहज और सीमाबद्ध सुरक्षा के बिना उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार बढ़ रहा है।   विशेषज्ञों का कहना है कि Grok जैसी तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं थी। यूजर्स ने सामान्य तस्वीरें डालकर AI से कहा कि उनके कपड़े हटा दो, और कई मामलों में AI ने बिना आपत्ति जताए ऐसा ही किया। परिणामस्वरूप इंटरनेट पर महिलाओं, लड़कियों और कम उम्र के बच्चों की नग्न और अर्धनग्न तस्वीरें वायरल होने लगीं। इनकी क्वॉलिटी इतनी अच्छी थी कि लोग इन्हें वास्तविक समझ बैठे।   सरकार ने X को कानूनी नोटिस भेजा है, लेकिन इस घटना ने AI से जुड़े खतरों को फिर से ...
दिल्ली दंगा केस: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दी, ओवैसी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
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दिल्ली दंगा केस: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दी, ओवैसी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

  नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली। इस फैसले के बाद देश में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और कानून पर सवाल उठाए।   ओवैसी ने याद दिलाया कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) में संशोधन यूपीए सरकार के दौरान किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय आतंकवाद की परिभाषा में ऐसी बातें जोड़ी गईं थीं, जिनका दुरुपयोग संभव है। ओवैसी ने 2007-08 में लोकसभा में सवाल उठाया था कि "किसी भी अन्य तरीके से, चाहे वह किसी भी प्रकृति का हो" का क्या मतलब है।   उन्होंने कांग्रेस पर सीधे निशाना साधते हुए कहा, "आज उसी कानून के आधार पर दो नौजवानों को जमानत नहीं मिल रही है। इनमें से एक तो साढ़े पांच साल से जेल में है। क्या आजादी के बाद कांग्रेस का कोई नेता इतने...
पाकिस्तान-चीन के लिए खतरे की घंटी! भारत अपने स्वदेशी पिनाका रॉकेट की रेंज बढ़ाने जा रहा है, सेना ने जारी किया ऑर्डर
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पाकिस्तान-चीन के लिए खतरे की घंटी! भारत अपने स्वदेशी पिनाका रॉकेट की रेंज बढ़ाने जा रहा है, सेना ने जारी किया ऑर्डर

  नई दिल्ली: भारतीय सेना ने अपने स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर की रेंज बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। यह कदम पाकिस्तान और चीन के लिए एक गंभीर चेतावनी साबित हो सकता है, क्योंकि सेना इस रॉकेट के रेंज को 150 किमी से ज्यादा बढ़ाने के लिए काम कर रही है। सेना के इस प्रयास से उसकी दूर से सटीक हमले की क्षमता में इजाफा होगा, जो उसे किसी भी दुश्मन के ठिकाने को दूर से ही निशाना बनाने की ताकत देगा।   भारतीय सेना ने पिनाका रॉकेट लॉन्चर को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने के लिए टाटा और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी प्रमुख निजी रक्षा कंपनियों को ऑर्डर दिए हैं। यह कंपनियां पहले भी पिनाका रॉकेट सिस्टम के निर्माण में शामिल रही हैं। इस साझेदारी के तहत, दोनों कंपनियां सेना के बेस वर्कशॉप्स के साथ मिलकर पिनाका रॉकेट के विभिन्न पुर्जों को अपग्रेड करेंगी, तकनीकी सहायता प्रदान करेंगी और पुर...
भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती देने पर चर्चा, राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा का भी उल्लेख
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भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती देने पर चर्चा, राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा का भी उल्लेख

  नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों फ्रांस के दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने शुक्रवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं। जयशंकर ने इस मुलाकात को लेकर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक घटनाक्रमों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और भी मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक भावनाओं का आदान-प्रदान किया।   इस दौरान, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विचार-विमर्श किया और भारत-फ्रांस के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और वैश्विक मंचों पर सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर चर्चा की। जयशंकर ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति की आगामी भारत यात्रा का भी उल्लेख करते हुए कहा, "हम राष्ट्रपति मैक्रों के जल्द ही भारत आ...
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर नेहरू थे विरोधी, बीजेपी ने फिर उठाया मुद्दा
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सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर नेहरू थे विरोधी, बीजेपी ने फिर उठाया मुद्दा

नई दिल्ली: सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के मुद्दे पर देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। बीजेपी ने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तीखा हमला किया है और सोशल मीडिया पर उनके कई पत्रों का हवाला देते हुए दावा किया है कि नेहरू सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के पक्ष में नहीं थे। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने X पर पोस्ट करके कहा कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी और हिंदू सांस्कृतिक प्रतीकों के महत्व को कमतर समझा। उन्होंने कहा कि नेहरू ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कैबिनेट मंत्रियों को भी शामिल होने से रोका और मीडिया कवरेज को सीमित करने की कोशिश की। त्रिवेदी ने 21 अप्रैल 1951 को नेहरू द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखे पत्र का जिक्र किया। इस पत्र में नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के दरवाजों की कहानी को 'पूरी तरह झूठा' बताया औ...
ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की साख पर लगाई चोट, कांग्रेस ने अमर्त्य सेन का नाम लिया निशाना
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ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की साख पर लगाई चोट, कांग्रेस ने अमर्त्य सेन का नाम लिया निशाना

नई दिल्ली: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से बुलाए जाने पर कांग्रेस ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगाया है और यह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश करने के लिए किया गया। कांग्रेस ने X पर लिखा, "SIR की धांधली को समझिए। चुनाव आयोग ने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को अपनी नागरिकता साबित करने को कहा है। बाकायदा इसके लिए उन्हें नोटिस भेजा गया है। ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगाया है, वो भी सिर्फ इसलिए कि उन्हें अपने मालिक मोदी को खुश करना है।" कांग्रेस ने इसे बेहद दुखद घटना बताया और कहा कि चुनाव आयोग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने दावा कि...
पश्चिम के पाखंड पर जयशंकर का बड़ा हमला, भारत के लिए सलाह देने वाले देशों को लताड़ा
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पश्चिम के पाखंड पर जयशंकर का बड़ा हमला, भारत के लिए सलाह देने वाले देशों को लताड़ा

    नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लक्जमबर्ग में भारत और दक्षिण एशियाई देशों के खिलाफ पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान पश्चिमी देशों द्वारा भारत को दी गई सलाह को पाखंड करार दिया और इस पर तीखा हमला बोला।   जयशंकर ने कहा, "जब पश्चिमी देशों में हिंसा होती है तो हम कभी नहीं टोकते, लेकिन जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के तहत जवाबी कार्रवाई की, तो पश्चिम के कई देशों ने हमसे ज्ञान देना शुरू कर दिया था।"   पश्चिमी देशों का दोहरा रवैया: विदेश मंत्री ने कहा कि जब दक्षिण एशिया से बहुत दूर के देशों को भारत और पाकिस्तान के मामलों पर टिप्पणी करने का अवसर मिलता है, तो वे बिना पूरी संवेदनशीलता और जमीनी हकीकत को समझे, हस्तक्षेप करने लगते हैं। उन्होंने कहा, "कई बार पश्चिमी देशों का अपना हित होता है, और कभी...
कुत्ते कब काटने के मूड में हैं, कैसे समझें? सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब, कपिल सिब्बल की दलील पर आई प्रतिक्रिया
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कुत्ते कब काटने के मूड में हैं, कैसे समझें? सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब, कपिल सिब्बल की दलील पर आई प्रतिक्रिया

  नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों के मामलों पर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कुत्तों के अजीब व्यवहार पर चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि स्कूलों, अस्पतालों और अदालतों जैसी सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्ते क्यों होने चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुत्तों का व्यवहार समझ पाना मुश्किल है, और यह जानना कि वे कब काटने के मूड में हैं, असंभव है।   कोर्ट की टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल थे, ने कहा कि "कुत्ते के मूड को समझना संभव नहीं है," और इस समस्या से निपटने के लिए रोकथाम इलाज से बेहतर है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कुत्ते सड़क पर चलते हुए साइकिल और वाहनों के पीछे दौड़ते हैं, तो इससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं, और यह एक गंभीर समस्या बन सकती है।   कपिल सिब्बल का सुझाव: इस मुद्दे ...