
नई दिल्ली: अमेरिका की टैरिफ धमकियों और वैश्विक सप्लाई चेन के दबावों के बीच भारत अब आत्मनिर्भर और स्वदेशी उत्पादों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने 5 प्रमुख स्वदेशी क्लस्टरों के विकास की योजना बनाई है, ताकि देश की रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो।
नागेश्वरन ने कहा कि वैश्विक व्यापार अब आपसी भरोसे पर आधारित नहीं रहा। अमेरिका के टैरिफ, चीन की एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग और यूरोपीय यूनियन के कार्बन सीमा उपाय जैसे कदम भारत के लिए गंभीर चुनौती हैं। ऐसे में स्वदेशीकरण को ‘पॉलिसी इंस्ट्रूमेंट’ के रूप में अपनाना जरूरी है।
स्वदेशीकरण के पांच प्रमुख क्लस्टर
इनमें सेमीकंडक्टर्स और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्रमुख हैं, जहां भारत को रणनीतिक अंतराल को भरने की आवश्यकता है। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक रसायन, टेलीकॉम और नेटवर्किंग उपकरण शामिल हैं।
आत्मनिर्भरता के तीन स्तंभ
नागेश्वरन ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के लिए तीन मुख्य बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
- बड़े रेगुलेटरी सुधारों के माध्यम से स्वदेशी इकोसिस्टम तैयार करना।
- वैश्विक दृष्टिकोण वाली नीति अपनाना और विश्व बाजारों में निवेश को बढ़ावा देना।
- निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को सशक्त बनाना।
उन्होंने कहा कि पुरानी नौकरशाही और रेगुलेटरी बोझ को उद्यमी मानसिकता से बदलने की जरूरत है। भारत को चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करते हुए खुद का मजबूत इकोसिस्टम बनाना होगा।
स्वदेशीकरण प्राथमिकता वाले क्षेत्र
PM की अध्यक्षता वाली कॉन्फ्रेंस में CEA ने टियर 1 और टियर 2 क्षेत्रों की पहचान की। टियर 1 में खाना तेल, दाल, उर्वरक, औद्योगिक रसायन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और नेटवर्किंग उपकरण शामिल हैं। टियर 2 में भारी निर्माण मशीनरी, EV मोटर, गैर-महत्वपूर्ण मेडिकल डिवाइस और रणनीतिक कोर सामग्री शामिल हैं।
नागेश्वरन ने कहा कि भारत एक डेमोग्राफिक और आर्थिक बदलाव के मुकाम पर है। अगले दो दशकों में लाखों युवा कामकाजी क्षेत्र में शामिल होंगे। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए उच्च शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और अनुकूलन क्षमता बेहद जरूरी है।