
वॉशिंगटन: अमेरिका ने अपनी मिसाइल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का बड़ा कदम उठाया है। पेंटागन ने अमेरिकी डिफेंस कंपनी रेथियॉन के साथ पांच अलग-अलग डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। इस योजना के तहत अगले सात सालों तक अमेरिकी मिसाइलों का उत्पादन लगातार बढ़ाया जाएगा।
टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों में 20 गुना वृद्धि
रेथियॉन के अनुसार, टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का सालाना उत्पादन वर्तमान में 50 यूनिट से बढ़ाकर 1,000 यूनिट तक किया जाएगा। यह अमेरिका को जरूरत पड़ने पर लगातार स्ट्राइक ऑपरेशन करने की क्षमता देगा।
एयर-टू-एयर मिसाइल AIM-120 की उत्पादन वृद्धि
AIM-120 AMRAAM मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों का उत्पादन भी सालाना 1,900 यूनिट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। ये मिसाइलें NATO और नॉन-NATO देशों के फाइटर जेट्स और NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम में इंटरसेप्टर के रूप में इस्तेमाल होती हैं। भविष्य में इन्हें ग्रिपेन फाइटर जेट्स में भी इंटीग्रेट किया जा सकता है।
SM-6 और SM-3 इंटरसेप्टर की क्षमता में इजाफा
अमेरिका की सबसे घातक मिसाइलों में शामिल SM-6 का उत्पादन चार गुना बढ़ाकर सालाना 500 यूनिट करने का निर्णय लिया गया है। SM-6 रूसी किंझल और जिरकॉन जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम मानी जाती है। इसके अलावा, SM-3 ब्लॉक IIA और IIB इंटरसेप्टर के उत्पादन को भी तेजी से बढ़ाने की योजना है, जो NATO के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस आर्किटेक्चर का हिस्सा हैं।
यूक्रेन युद्ध में भी मिसाइलों का इस्तेमाल संभव
अमेरिका की ये मिसाइलें यूक्रेन युद्ध के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यूक्रेन की डिफेंस फोर्सेस NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम और F-16 फाइटर जेट्स में AIM-120 मिसाइलों का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि अभी सीधे अमेरिकी मिलिट्री मदद के तहत ये मिसाइलें सप्लाई नहीं की जा रही हैं, लेकिन अन्य देशों के माध्यम से PURL पहल के तहत यूक्रेन के लिए ऑर्डर दिए जा रहे हैं।
विश्लेषण:
अमेरिका का यह कदम चीन और रूस से संभावित टकराव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। मिसाइल उत्पादन बढ़ाने का मकसद न केवल रक्षा क्षमता मजबूत करना है, बल्कि वैश्विक सैन्य संतुलन में अमेरिकी दबदबा बनाए रखना भी है।