Saturday, February 7

भारत शांति काल में भी मिसाइलों पर रखेगा परमाणु बम

स्टॉकहोम/नई दिल्ली: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की 2025 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने परमाणु हथियारों की नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब शांति काल में भी अपने परमाणु बमों को उनकी मिसाइलों के साथ तैनात रख सकता है, जिससे युद्ध की स्थिति में तत्काल सेकंड-स्ट्राइक क्षमता सुनिश्चित हो सके।

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तीन-स्तरीय परमाणु तिकड़ी
SIPRI रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास जमीन (मिसाइल), हवा (फाइटर जेट) और समुद्र (पनडुब्बी) तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की मजबूत क्षमता है। इस तरह भारत की परमाणु तिकड़ी पूरी तरह विकसित हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर, हाल ही में भारत ने पनडुब्बी से दागी जाने वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।

क्या बदल गई नीति?
पहले भारत शांति के समय अपने परमाणु हथियारों को उनके लॉन्चर से अलग रखता था, लेकिन अब मिसाइलों को कैनिस्टर में रखा जा रहा है और समुद्र-आधारित डेटरेंस पेट्रोलिंग की जा रही है। इसका मतलब है कि भारत अब जरूरत पड़ने पर तुरंत परमाणु जवाबी हमला कर सकता है। SIPRI के अनुसार यह बदलाव चीन और पाकिस्तान की बढ़ती धमकियों के मद्देनजर किया गया है।

चीन और पाकिस्तान पर फोकस
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत का ध्यान अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास पर ज्यादा है, जिससे चीन में लक्षित क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके। वहीं पाकिस्तान की परमाणु क्षमता 170 वॉरहेड्स के स्तर पर बनी हुई है और पाकिस्तान भी पनडुब्बियों से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइलों के जरिए परमाणु हमला करने की क्षमता विकसित कर रहा है।

विशेषज्ञ का विश्लेषण
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (IIPA) के फैकल्टी डॉ. मनन द्विवेदी ने नवभारत टाइम्स से कहा, “दुनिया नए हथियारों के जखीरे के कगार पर है। भारत के हालिया कदम यह संकेत देते हैं कि देश अब शांति काल में भी अपने कुछ परमाणु हथियारों को उनके लॉन्चरों के साथ जोड़ने की दिशा में बढ़ रहा है। यह नीति चीन और पाकिस्तान से लगातार बढ़ते खतरों के मद्देनजर अपनाई गई है।”

नीति का वैश्विक महत्व
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि भारत की इस नीति का मतलब है कि युद्ध की आपात स्थिति में बहुत कम समय में परमाणु जवाबी हमला संभव होगा। यह कदम भारत की डिटेरेंस क्षमता को मजबूत करता है और इसे चीन और पाकिस्तान से मिलने वाले लगातार बदलते खतरों के प्रति तैयार रखता है।

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