
इस्लामाबाद: पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा और विद्रोह की आग में जल रहा है। यहाँ केवल अशांति नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध, सेना की सख्त कार्रवाई और सशस्त्र प्रतिरोध का गढ़ बन गया है। हाल के वर्षों में बलूच विद्रोहियों ने पूरे सूबे में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर कई भीषण हमले किए हैं।
विद्रोहियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। पाकिस्तान ने भी स्वीकार किया है कि बलूचिस्तान में हालात नियंत्रित करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान कितना खतरनाक
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में संसद में कहा कि बलूच विद्रोही पहले से अधिक संगठित और सशस्त्र हैं। उनके पास अत्याधुनिक हथियार हैं, जिनकी कीमत 20,000 डॉलर तक है। असॉल्ट राइफल की कीमत ही लगभग 2,000 डॉलर है।
सेना ने हालात को नियंत्रित करने के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है। इसके बावजूद विद्रोह निरंतर बढ़ रहा है, जिसमें महिलाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी भी बढ़ रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि बलूचिस्तान पर विद्रोह पाकिस्तान को अधिक स्वायत्तता देने के लिए मजबूर कर सकता है, लेकिन स्वतंत्रता की मांग के चलते हथियारबंद संघर्ष और तेज हो सकता है।
बलूचिस्तान का भूगोल और रणनीतिक महत्व
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क्षेत्रफल: 3,47,190 वर्ग किलोमीटर, पाकिस्तान की कुल भूमि का लगभग 44%
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राजधानी: क्वेटा (आबादी लगभग 16 लाख)
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अन्य बड़े शहर: तुरबत, खुजदार
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सीमाएं:
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पश्चिम: ईरान
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उत्तर: अफगानिस्तान
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पूर्व और उत्तर-पूर्व: पाकिस्तान के सिंध, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत
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सागर किनारा: अरब सागर (77 किलोमीटर तटरेखा)
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भू-रणनीतिक महत्व: ग्वादर बंदरगाह, चीन का सीपीईसी प्रोजेक्ट
आबादी और संसाधन
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आबादी: लगभग 1.5 करोड़
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52% बलूच
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36% पश्तून
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बाकी ब्राहुई, हजारा और अन्य समुदाय
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प्राकृतिक संसाधन: प्राकृतिक गैस, सोना, तांबा, कोयला और दुर्लभ पृथ्वी तत्व
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रणनीतिक महत्व: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के नजदीक
बलूचिस्तान की समृद्धि और रणनीतिक स्थिति इसे पाकिस्तान के लिए आर्थिक और सामरिक दृष्टि से अनिवार्य बनाती है। लेकिन विद्रोह की बढ़ती लहर और स्थानीय समर्थन के कारण पाकिस्तान के लिए इस सूबे में नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है