
मैनपुरी में तैनात निलंबित सर्कल ऑफिसर (सीओ) ऋषिकांत शुक्ला की नोएडा में बेनामी संपत्तियों की जांच जोर पकड़ रही है। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के तहत विजिलेंस विभाग ने गौतमबुद्ध नगर जिले की तीनों अथॉरिटी में उनकी बेमानी संपत्तियों की तलाश तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच में सामने आया है कि पिछले 10 वर्षों में ऋषिकांत शुक्ला ने लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। जांच रिपोर्ट शासन को मिलने के बाद प्रमुख सचिव, सतर्कता के निर्देश पर विजिलेंस टीम ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी में उनकी बेनामी संपत्तियों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है।
विजिलेंस को यह जानकारी मिली है कि निलंबित सीओ की तीन बेनामी संपत्तियां गौतमबुद्ध नगर जिले में हैं। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि ये संपत्तियां किनके नाम पर दर्ज हैं और उनका वास्तविक मालिक कौन है।
ऋषिकांत शुक्ला कानपुर में 1998 से 2006 तक दरोगा रहे और 2006 से 2009 तक इंस्पेक्टर के रूप में तैनात रहे। मैनपुरी में सीओ के पद पर रहते हुए उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस ने जांच शुरू की। साथ ही, उन्हें जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे के गिरोह का सदस्य भी बताया गया है।
एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने सीओ ऋषिकांत शुक्ला को निलंबित कर दिया। जांच में उनकी 12 स्थानों पर 92 करोड़ रुपये की संपत्ति सामने आई थी, जबकि नोएडा में तीन बेनामी संपत्तियों की कीमत आठ करोड़ रुपये बताई गई है।
पिछले साल 3 नवंबर को सचिव जगदीश ने प्रमुख सचिव, विजिलेंस विभाग को पत्र लिखकर ऋषिकांत शुक्ला की संपत्तियों की जांच का आदेश दिया था। जांच में यह भी सामने आया कि सीओ ने अपने परिवार, सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर करीब 100 करोड़ की संपत्ति अर्जित की है। वर्तमान में विजिलेंस टीम उनकी और उनसे जुड़े दस पुलिस कर्मियों की बेनामी संपत्तियों की जांच में जुटी है।