Friday, January 23

‘हनुमान और राम की वानर सेना आदिवासी थी’—उमंग सिंघार के बयान से सियासी घमासान, बीजेपी ने कहा– समाज को गुमराह कर रहे

 

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मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। बड़वानी जिले के सेंधवा सबडिवीजन स्थित गेरू घाटी में आयोजित आदिवासी अधिकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान और भगवान राम की वानर सेना आदिवासी थी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है।

 

‘वानर केवल बंदर नहीं, जंगल में रहने वाले आदिवासी थे’

उमंग सिंघार ने अपने संबोधन में कहा कि रामायण में राम की सेना का उल्लेख मिलता है, लेकिन बाद में वानरों को केवल बंदर के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि वे जंगलों में रहने वाले आदिवासी थे। शबरी का उदाहरण देते हुए सिंघार ने सवाल किया कि क्या पूरे वन क्षेत्र में भगवान राम को बेर खिलाने वाली शबरी ही अकेली आदिवासी थीं। उन्होंने कहा कि भगवान राम की विजय आदिवासियों के सहयोग के बिना संभव नहीं थी।

 

हनुमान को बताया आदिवासी वंशज

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देशभर में गांव-गांव हनुमान मंदिर हैं और लोग उनकी पूजा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान हमारे वंशज थे और वे आदिवासी समाज से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हनुमान की पतंग उड़ाते हुए दिखाई गई एक तस्वीर का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या इसका अर्थ आदिवासियों को ‘उड़ाना’ है। सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज में ताकत, साहस और आत्मसम्मान है और उनकी संस्कृति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

बीजेपी का पलटवार—तथ्यों के बिना बयान

उमंग सिंघार के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा आदिवासी मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ. रेलास सेनानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता बिना तथ्यों के बयान देकर आदिवासी समाज को गुमराह करने और सामाजिक विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सनातन हिंदू परंपरा और संविधान में आस्था रखता है।

 

आदिवासी संगठनों में नाराजगी

कांग्रेस नेताओं उमंग सिंघार और जीतू पटवारी के हालिया बयानों को लेकर आदिवासी समाज के कुछ संगठनों ने भी असहमति जताई है। संगठनों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर बयान देते समय जिम्मेदारी और ऐतिहासिक तथ्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

 

पहले भी विवादों में रहे हैं सिंघार

यह पहली बार नहीं है जब उमंग सिंघार अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे आदिवासी पहचान, धर्म और संस्कृति से जुड़े बयानों के कारण राजनीतिक आलोचना का सामना कर चुके हैं।

 

बीजेपी नेताओं ने किया बचाव

उधर भाजपा नेता और राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के पुत्र विकास आर्य ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में विकास के कई काम किए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से क्षेत्र के इतिहास और विकास कार्यों का तथ्यात्मक मूल्यांकन करने की मांग की।

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