
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में 8 अप्रैल 2007 को हुई छात्र हत्या के मामले में कोर्ट ने 19 साल बाद तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों आरोपी पूर्व छात्र हैं और अब उन्हें जेल भेज दिया गया है। अदालत ने प्रत्येक पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
वारदात कैसे हुई:
मामला छात्रसंघ अध्यक्ष चुनाव से जुड़ी रंजिश का है। 8 अप्रैल 2007 की रात मृतक नबील अहमद के साथी साबित अली, मुहम्मद शाहनवाज और निजामुद्दीन के साथ हबीब हॉल के सामने ढाबे पर चाय पी रहे थे। तभी दो बाइकों पर सवार आरोपी छात्र वहां पहुंचे और तमंचे से फायरिंग शुरू कर दी। गोली साबित अली के बाईं बगल में लगी। हमले के बाद आरोपी फरार हो गए। साबित अली को जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया।
मृतक और आरोपी:
साबित अली बिहार का निवासी था और एएमयू में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था। आरोपी पूर्व छात्र आसिफ नवी खां, गीतम सिंह कुशवाह और आविद अंसारी उर्फ चौधरी थे। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीडीआर और गवाह बयानों के आधार पर तीनों को दोषी करार दिया। घटना में इस्तेमाल हथियार भी पुलिस ने बरामद किया था।
कोर्ट प्रक्रिया:
सुनवाई के दौरान कुल 10 गवाह पेश किए गए। वादी नबील अहमद वर्तमान में चेन्नई में नौकरी कर रहे हैं। अन्य गवाह पश्चिम बंगाल और दिल्ली से थे। कोर्ट ने सभी साक्ष्यों और गवाहों की गवाही को महत्व देते हुए तीनों को दोषी ठहराया।
सजा और जेल:
तीनों आरोपी पहले जमानत पर थे। दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जेल भेजा गया। गुरुवार को सजा सुनाने के दौरान कोर्ट ने उन्हें पुनः जेल भेज दिया।
इस घटना ने एएमयू में छात्र राजनीति और गुटबाजी की हिंसक रूपरेखा को उजागर किया और लंबे समय तक कानून की प्रक्रिया को प्रभावित किया।