
नई दिल्ली।
राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन गण मन को लेकर चल रही बहस के बीच कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा सरकार जानबूझकर ऐतिहासिक तथ्यों को छिपा रही है और इससे देश की विरासत तथा महान विभूतियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है।
कांग्रेस महासचिव एवं पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “भारत का सबसे बड़ा इतिहास-विकृतकर्ता (डिस्टोरियन)” करार दिया।
‘राष्ट्रगान के इतिहास को भी किया गया विकृत’
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि हाल ही में संसद में राष्ट्रगान को लेकर हुई चर्चा के दौरान सरकार ने उसके इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इससे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
रमेश ने लिखा, “पिछले महीने संसद में राष्ट्रगान पर हुई बहस ने प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों को असहज कर दिया। उसी दौरान राष्ट्रगान के इतिहास को विकृत करने का प्रयास किया गया, जिससे टैगोर की गरिमा को नुकसान पहुंचा।”
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का संदर्भ
कांग्रेस का यह बयान नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर सामने आया। जयराम रमेश ने दावा किया कि वर्ष 1937 में नेताजी ने वंदे मातरम् के कुछ छंदों को लेकर उठे विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक तथ्य को जानबूझकर नजरअंदाज किया।
उन्होंने यह भी कहा कि नेताजी के प्रपौत्र और प्रसिद्ध इतिहासकार सुगाता बोस ने अपनी पुस्तक ‘द नेशन ऐज़ मदर एंड अदर विज़न्स ऑफ नेशनहुड’ में उल्लेख किया है कि नेताजी ने 2 नवंबर 1942 को बर्लिन में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के रूप में चुना था।
‘गांधी की विरासत को मिटाने का प्रयास’
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर महात्मा गांधी की स्मृतियों और विरासत को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि नेताजी ने ही सबसे पहले गांधीजी को ‘राष्ट्रपिता’ कहा था और आज़ाद हिंद सरकार के लिए ‘जय हिंद’ का नारा अपनाया, लेकिन मौजूदा सरकार और बीजेपी इन ऐतिहासिक तथ्यों को महत्व नहीं देती।
जयराम रमेश ने मनरेगा जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि यह गांधीवादी सोच को कमजोर करने का संकेत है।
‘भारत के सबसे बड़े इतिहास-विकृतकर्ता’
अपनी पोस्ट के अंत में कांग्रेस महासचिव ने लिखा,
“प्रधानमंत्री भारत के सबसे बड़े इतिहास-विकृतकर्ता हैं। शायद पूरे राजनीतिक विज्ञान में इसी की पढ़ाई होती थी।”
उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ सुगाता बोस की पुस्तक की तस्वीर भी साझा की।