Thursday, January 22

जम्मू की बेटी ने रचा इतिहास: पहली महिला रुद्र आर्म्ड हेलीकॉप्टर पायलट बनीं कैप्टन हंसजा

 

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जम्मू से नई दिल्ली तक का सफर कैप्टन हंसजा के लिए साहस, समर्पण और प्रेरणा से भरा रहा है। बेस्ट कॉम्बैट एविएटर के लिए सिल्वर चीता ट्रॉफी जीतने वाली पहली महिला के बाद, अब वे भारत की पहली महिला रुद्र आर्म्ड हेलीकॉप्टर पायलट बन गई हैं। वे 26 जनवरी 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में 251 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन की कमान संभालेंगी।

 

स्कूल की सीख ने बदली तकदीर

कैप्टन हंसजा का जन्म 9 मार्च 1998 को जम्मू में हुआ। उनकी मां रुश्मी शर्मा, एक जर्नलिस्ट हैं। हंसजा की स्कूलिंग सेंट जेवियर्स स्कूल, जम्मू में हुई। स्कूल की दीवार पर लिखी एक लाइन “Be brutal to yourself” (खुद के प्रति कठोर बनो) ने उनके जीवन को दिशा दी। यह संदेश उन्हें रोज अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता था।

 

कॉम्बैट एविएटर ट्रेनिंग और उपलब्धियां

12वीं के बाद हंसजा ने गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वुमेन (GCW), जम्मू से बैचलर डिग्री हासिल की और फिर भारतीय सेना में शामिल होने का निर्णय लिया। उन्होंने नासिक के कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल (CAATS) में टफ ट्रेनिंग पूरी की। कोर्स के दौरान उन्होंने उच्च गति वाले कॉम्बैट मिशन के लिए प्रशिक्षण लिया और अपने कोर्स में टॉप कर सिल्वर चीता ट्रॉफी जीतने वाली पहली महिला बनीं।

 

आर्मी एविएशन कोर और चुनौतियां

हंसजा ने कम उम्र में भारतीय सेना में शामिल होकर आर्मी एविएशन कोर चुना। इस क्षेत्र में हर दिन नई चुनौती होती है। उनकी ट्रेनिंग आर्मी ट्रेनिंग कमांड (ARTRAC) की देखरेख में हुई।

 

हालांकि, सेना में शामिल होने का सपना आसान नहीं था। पहली कोशिश में मेडिकल टेस्ट में अस्थायी अस्वीकृति मिली, लेकिन हंसजा ने 15 दिन की नाक सर्जरी करवाई और फिर भारतीय सेना में शामिल हुईं।

 

इतिहास रचते हुए रुद्र हेलीकॉप्टर की कमान

कैप्टन हंसजा अब भारत की पहली महिला रुद्र आर्म्ड हेलीकॉप्टर पायलट हैं। उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी। रुद्र हेलीकॉप्टर स्वदेशी और हथियारों से लैस लड़ाकू हेलीकॉप्टर है। हंसजा का यह उपलब्धि नारी शक्ति और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन गई है।

 

 

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