Thursday, January 22

वैज्ञानिकों ने खोजा नया ब्लड टेस्ट, 1 महीने में बताएगा ब्रेस्ट कैंसर इलाज का असर

नई दिल्ली: ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम और गंभीर बीमारियों में से एक है। इस कैंसर का इलाज हर मरीज पर समान असर नहीं करता, जिससे डॉक्टरों के लिए सही दवा चुनना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अब वैज्ञानिकों ने एक नया डीएनए ब्लड टेस्ट विकसित किया है, जो केवल चार हफ्तों में यह पता लगा सकता है कि मरीज पर दवा असर कर रही है या नहीं।

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लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च को किया और इसे क्लिनिकल कैंसर रिसर्च जर्नल में प्रकाशित किया। इस अध्ययन में 167 ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के ब्लड सैंपल लिए गए। इलाज शुरू होने से पहले और चार हफ्ते बाद खून में मौजूद कैंसर डीएनए का स्तर मापा गया। इसके लिए लिक्विड बायोप्सी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जो खून में मौजूद बहुत कम मात्रा के कैंसर डीएनए का पता लगाने में सक्षम है।

डीएनए क्यों है अहम
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने सर्कुलेटिंग ट्यूमर डीएनए (ctDNA) की जांच की। यह वह डीएनए है, जो कैंसर सेल्स खून में छोड़ती हैं। स्टडी में पाया गया कि जिन मरीजों में इलाज शुरू होने के समय ctDNA का स्तर कम था, उनमें दवाओं का असर बेहतर रहा। चार हफ्ते बाद भी यही परिणाम देखने को मिला।

डॉक्टरों के लिए अहम:
आईसीआर की क्लिनिकल रिसर्च फेलो, डॉक्टर इसॉल्ट ब्राउन के अनुसार, यह सरल ब्लड टेस्ट शुरुआती दौर में डॉक्टरों को यह समझने में मदद कर सकता है कि मरीज को दी जा रही दवा असर करेगी या नहीं। इससे गैर-प्रभावी दवाओं से बचा जा सकता है और समय रहते इलाज में बदलाव किया जा सकता है।

इलाज बदलने के विकल्प:
अगर ब्लड टेस्ट से पता चले कि इलाज असर नहीं कर रहा, तो मरीज को दूसरी टारगेटेड थेरेपी, दवाओं का नया संयोजन या किसी क्लिनिकल ट्रायल में शामिल किया जा सकता है। इससे कैंसर को बढ़ने से पहले ही कंट्रोल करने का मौका मिल सकता है।

स्टडी के ग्रुप और नतीजे:
इस अध्ययन में मरीजों को उनके कैंसर के प्रकार और जीन म्यूटेशन के आधार पर दो ग्रुप में बांटा गया। पहले ग्रुप में खास जीन म्यूटेशन वाले मरीज थे, जिन्हें टारगेटेड इलाज दिया गया। दूसरे ग्रुप में ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर वाले मरीज थे, जिन्हें दो दवाओं का संयोजन दिया गया।

वैज्ञानिक अब यह जांच रहे हैं कि क्या शुरुआती ब्लड टेस्ट के आधार पर इलाज में बदलाव मरीजों की जीवन अवधि और जीवन गुणवत्ता को बढ़ा सकता है। अगर यह तरीका सफल होता है, तो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

 

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