
भोपाल। मध्यप्रदेश के किसानों के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान से किसानों को बड़ी सौगात देते हुए घोषणाओं की झड़ी लगा दी। मुख्यमंत्री ने औपचारिक रूप से वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित करते हुए कहा कि सोयाबीन के बाद अब सरसों की फसल पर भी किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि गेहूं की सरकारी खरीद का मूल्य चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 2700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएगा। इस घोषणा से प्रदेश के लाखों किसानों में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
खेती को लाभ का धंधा बनाने का रोडमैप
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य खेती को घाटे का नहीं, बल्कि लाभ का व्यवसाय बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों से किए गए हर वादे को जमीन पर उतारा जाएगा।
उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने तीन वर्षों की विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत 30 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे सिंचाई की लागत में भारी कमी आएगी। इसके अलावा शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण की सुविधा भी जारी रहेगी।
कृषि अनुसंधान और आधुनिकीकरण पर जोर
कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने कई नई पहल की हैं। मुख्यमंत्री ने ई-विकास पोर्टल और कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान प्रणाली ऐप का शुभारंभ किया, जिससे किसान घर बैठे खाद की बुकिंग कर सकेंगे।
साथ ही, ग्वालियर में सरसों, उज्जैन में चना और डिंडौरी में श्रीअन्न (मिलेट्स) के लिए विशेष अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाने की घोषणा की गई।
1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली
कार्यक्रम की शुरुआत कोकता बायपास से निकाली गई 1101 ट्रैक्टरों की विशाल रैली से हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं ट्रैक्टर की ड्राइविंग सीट पर नजर आए और कुछ दूरी तक ट्रैक्टर चलाकर किसानों का उत्साह बढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 सरकारी विभाग आपसी समन्वय से काम करेंगे, ताकि किसानों को बीज से लेकर बाजार तक किसी भी स्तर पर परेशानी न हो।