
बीजिंग/नई दिल्ली, 12 जनवरी 2026 – भारत के राफेल लड़ाकू विमान ने चीन को केवल डराया ही नहीं, बल्कि उसकी रणनीतिक तैयारियों को भी प्रभावित किया है। चीन ने हाल ही में भारतीय राफेल के खिलाफ J-16 फाइटर जेट का इस्तेमाल कर नकली युद्धाभ्यास किया। यह जानकारी चीन की सरकारी चैनल CCTV द्वारा जारी वीडियो में सामने आई है।
वीडियो में दिखाया गया है कि J-16 और राफेल लड़ाकू विमान हवा में मुकाबला कर रहे हैं। इस नकली युद्धाभ्यास का आयोजन हेनान प्रांत के शुचांग में किया गया था। इसमें चीनी थल सेना की कम से कम 20 यूनिट्स ने भाग लिया। बोर्ड पर हवाई युद्ध का सीन दर्शाया गया और अधिकारी खतरों की ओर इशारा कर रहे थे।
राफेल क्यों है चुनौती
डिफेंस विशेषज्ञों का मानना है कि J-16 और राफेल को वॉरगेम सिमुलेशन के लिए चुना गया। J-16 की क्षमताओं को नए J-20 और J-35 जेट्स के मुकाबले सिमुलेट करना आसान है। वहीं, चीन को सिर्फ राफेल से ही नहीं, बल्कि अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट से भी काफी डर है। F-35 की क्षमताओं को वॉरगेम में सिमुलेट करना बेहद मुश्किल है।
अमेरिकी वायुसेना ने ताइवान जलडमरूमध्य के पास ओकिनावा में F-15EX चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट्स भी तैनात किए हैं, जिसे चीन चुनौती मान रहा है।
भारत की राफेल योजना
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल 36 राफेल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत फ्रांस से 114 और राफेल जेट्स खरीद सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल ने पाकिस्तान और पीओके स्थित 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह किया था। भारत और फ्रांस के बीच ‘सरकार से सरकार’ स्तर पर राफेल डील की संभावनाओं पर बातचीत चल रही है।
राफेल ने न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर डाला है। चीन के नकली युद्धाभ्यास से स्पष्ट हो गया है कि राफेल की क्षमताओं ने पड़ोसी देश की रणनीतिक सोच पर असर डाला है।