
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने युवाओं से अपील की है कि वे अपने इतिहास से सीख लें और देश को मजबूत बनाने में योगदान दें। शनिवार को दिल्ली में आयोजित “विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग” के उद्घाटन समारोह में डोभाल ने कहा कि स्वतंत्र भारत को हमारे पूर्वजों ने अत्यधिक संघर्ष और बलिदानों के बाद हासिल किया।
डोभाल ने युवाओं से कहा, “यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि आज भारत के हर युवा के अंदर एक आग होनी चाहिए। ‘बदला’ शब्द शायद बहुत अच्छा न लगे, लेकिन यह एक ताकतवर एहसास है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना है और देश को उस मुकाम पर ले जाना है जहां हम अपने अधिकारों, अपने विश्वासों और अपने विचारों के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें।”
एनएसए ने बताया कि हमारी प्राचीन सभ्यता बहुत उन्नत और शांतिपूर्ण थी। “हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े और कहीं लूटपाट नहीं की। लेकिन सुरक्षा खतरों की अनदेखी करने से हमें इतिहास में कई कड़वे सबक मिले हैं। इसे भूल जाना देश के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा।”
युद्ध के मकसद को समझाते हुए डोभाल ने कहा, “हम युद्ध इसलिए नहीं लड़ते कि हमें दुश्मन के नुकसान में संतुष्टि मिले। युद्ध इसलिए लड़े जाते हैं ताकि किसी देश का मनोबल तोड़ा जा सके और वह हमारी शर्तों को मानने को तैयार हो। राष्ट्र की इच्छाशक्ति ही वह ताकत है जिसके लिए युद्ध किए जाते हैं।”
उन्होंने युवाओं से यह भी कहा कि अगर किसी देश के पास ताकत और संसाधन हों लेकिन मनोबल और नेतृत्व क्षमता न हो, तो उसकी सारी शक्ति बेकार हो जाती है। डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि उनके समर्पण और मेहनत से भारत तेज़ी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
“विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग” 12 जनवरी तक चलने वाला है और यह युवाओं को अपने विचार साझा करने और देश के विकास में योगदान देने का अवसर प्रदान करता है।