
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 5 जनवरी का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन जन्मे थे मंसूर अली खान पटौदी, जिन्हें क्रिकेट प्रेमियों ने प्यार से ‘टाइगर पटौदी’ कहा। एक आंख में रोशनी खोने के बावजूद उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और विदेश में पहली टेस्ट जीत दिलाने का गौरव हासिल किया।
21 साल की उम्र में बने कप्तान
पटौदी मात्र 21 साल की उम्र में भारतीय टीम के कप्तान बन गए। आज भी वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे कम उम्र में कप्तानी करने वाले भारतीय हैं। उन्होंने 46 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 40 में कप्तानी की और टीम को 9 जीत दिलाईं। हालांकि यह आंकड़ा बहुत अधिक नहीं है, लेकिन उनके आक्रामक खेल ने भारतीय क्रिकेट में नई जान फूंक दी।
एक आंख खोने के बावजूद जज्बा नहीं हारा
1961 में इंग्लैंड में हुए एक कार एक्सीडेंट के दौरान उनके दाहिने आंख की रोशनी चली गई। अधिकांश लोग मानने लगे थे कि उनका क्रिकेट करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन पटौदी ने हार नहीं मानी। उन्होंने नेट्स पर जाकर एक आंख से खेलने का अभ्यास शुरू किया और 6 महीने के अंदर ही भारत के लिए टेस्ट डेब्यू कर लिया। उनके छक्के और फील्डिंग कौशल उस समय पूरे क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय रहे।
टाइगर पटौदी का शानदार करियर
1961 से 1975 तक, पटौदी ने 46 टेस्ट मैचों में 34.91 की औसत से 2793 रन बनाए। उनके नाम 6 शतक और 16 अर्धशतक हैं। उन्होंने दूसरे ही टेस्ट में फिफ्टी बनाई और तीसरे टेस्ट में 103 रन की पारी खेलकर भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पहली टेस्ट सीरीज जीत दिलाई। उनके कप्तानी में भारत ने 1968 में न्यूजीलैंड को हराकर विदेशी धरती पर पहली टेस्ट जीत हासिल की। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 310 मैचों में 33 शतक की मदद से 15425 रन बनाए।
पर्सनल लाइफ और सम्मान
पटौदी का नाम केवल क्रिकेट तक ही सीमित नहीं रहा। 1968 में उन्होंने अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से शादी की। उनके पुत्र सैफ अली खान आज बॉलीवुड के जाने-माने स्टार हैं। मंसूर अली खान पटौदी को 1964 में अर्जुन अवॉर्ड, 1967 में पद्म श्री और 2001 में सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनका निधन 2011 में फेफड़ों के इंफेक्शन के कारण हुआ।
आज उनके जन्मदिन पर क्रिकेट जगत उन्हें उनके साहस, अद्भुत कप्तानी और देशभक्ति के लिए याद करता है। टाइगर पटौदी का नाम भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम पन्नों में सदैव चमकता रहेगा।