
देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा रखने वाले इंदौर में प्रशासनिक लापरवाही की एक भयावह तस्वीर सामने आई है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से 10 लोगों की मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस त्रासदी की चेतावनी दो साल पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे।
बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने वर्ष 2022 में ही अपने वार्ड क्रमांक 11 में जर्जर और पुरानी पानी की पाइपलाइनों को बदलने की मांग की थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि कहीं सीवेज का पानी पेयजल में न मिल जाए, लेकिन उनकी चेतावनियों को नगर निगम ने गंभीरता से नहीं लिया।
चिट्ठियों और शिकायतों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
पार्षद वाघेला का कहना है कि वे वर्ष 2023 से लगातार दूषित पानी की संभावना को लेकर आगाह करते रहे। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई, कई बार अधिकारियों को पत्र लिखे, लेकिन फाइलें दफ्तरों में धूल फांकती रहीं।
वाघेला के अनुसार, 12 नवंबर 2024 को पाइपलाइन बदलने की एक आधिकारिक फाइल तो बनाई गई, लेकिन उसे सात महीने तक रोके रखा गया। इसके बाद 30 जुलाई 2025 को मेयर से संपर्क करने पर टेंडर निकाला गया, मगर वह भी समय पर पूरा नहीं हुआ।
सीवेज मिला पानी, फैला डायरिया, गईं जानें
लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया। इलाके में डायरिया फैल गया और देखते ही देखते 10 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा साफ तौर पर बताता है कि समय रहते कदम उठाए जाते तो इन मौतों को रोका जा सकता था।
2.3 करोड़ की जरूरत, 40% पाइपलाइन जर्जर
पार्षद वाघेला ने बताया कि उनके वार्ड की करीब 40 प्रतिशत पाइपलाइनें बेहद पुरानी हो चुकी हैं। इन्हें बदलने के लिए लगभग 2.3 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। उन्होंने इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, कार्रवाई शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम के कमिश्नर को हटा दिया और अतिरिक्त कमिश्नर को निलंबित कर दिया है। हालांकि, अब तक नगर निगम के अधिकारियों की ओर से पार्षद के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सवाल वही—क्या प्रशासन की नींद अब खुलेगी?
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की असंवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है। सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई के बाद भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई जाएगी या फिर यह त्रासदी प्रशासन को सचमुच जगाने का काम करेगी?