
मुंबई। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रेखा का जीवन जितना चमकदार रहा है, उतना ही जटिल और भावनात्मक भी। उनके निजी जीवन से जुड़ा एक तथ्य आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है—रेखा अपने पिता, प्रसिद्ध तमिल अभिनेता जेमिनी गणेशन, के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई थीं। इस निर्णय के पीछे की वजह उन्होंने स्वयं शब्दों में बयां की थी।
रेखा का जन्म भानुरेखा गणेशन के रूप में हुआ था। वे जेमिनी गणेशन और अभिनेत्री पुष्पावल्ली की बेटी हैं। जिस समय पुष्पावल्ली और जेमिनी गणेशन के बीच संबंध थे, उस समय जेमिनी गणेशन पहले से विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे। ऐसे में रेखा का बचपन एक ऐसे माहौल में बीता, जहां उनके पिता कभी उनके साथ नहीं रहे।
पिता की अनुपस्थिति में बीता बचपन
रेखा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके घर में कभी पिता की मौजूदगी नहीं रही। उन्होंने सिमी गरेवाल से बातचीत में बताया,
“जब वह घर छोड़कर गए, तब मैं बहुत छोटी थी। मुझे उनकी कोई याद नहीं है। मुझे यह भी नहीं पता कि मैंने क्या खोया, क्योंकि मैंने कभी पिता होने का अनुभव ही नहीं किया।”
रेखा छह भाई-बहनों के साथ पली-बढ़ीं। उनकी मां पुष्पावल्ली के जीवन में तीन जीवनसाथी रहे, जबकि जेमिनी गणेशन के कुल आठ बच्चे थे। रेखा जानती थीं कि जेमिनी गणेशन ही उनके पिता हैं, लेकिन उन्होंने कभी उन्हें सार्वजनिक रूप से बेटी के रूप में स्वीकार नहीं किया।
कम उम्र में संघर्षों की शुरुआत
रेखा महज 14 वर्ष की थीं, जब आर्थिक तंगी के कारण उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा और फिल्मों में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पिता की स्वीकृति न मिलने और समाज की फुसफुसाहटों के बीच रेखा ने संघर्ष करते हुए अपने लिए अलग पहचान बनाई।
मंच पर साथ, जीवन में दूरी
सुपरस्टार बनने के बाद एक अवसर ऐसा भी आया, जब रेखा और जेमिनी गणेशन ने एक मंच साझा किया। उस क्षण ऐसा प्रतीत हुआ मानो पिता और बेटी के रिश्ते में मधुरता आ गई हो, लेकिन वास्तविक जीवन में दूरी बनी रही।
अंतिम संस्कार में क्यों नहीं गईं रेखा
वर्ष 2005 में जेमिनी गणेशन के निधन के बाद रेखा उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं। इस पर उन्होंने कहा था,
“मैं उनके लिए शोक क्यों करूं? मैं उनके जीवन, उनके मूल्यों और उनके अस्तित्व के लिए आभारी हूं। मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने उनके साथ कोई खराब पल नहीं बिताया। वे मेरे लिए कल्पना में थे, और वह कल्पना सच्चाई से कहीं अधिक सुंदर थी।”
रेखा के ये शब्द उनके जीवन की उस भावनात्मक सच्चाई को दर्शाते हैं, जिसमें रिश्तों की परिभाषा पारंपरिक नहीं, बल्कि अनुभवों और भावनाओं से तय होती है।