Thursday, January 1

कौन हैं नंदिनी चक्रवर्ती? चुनावों से पहले ममता बनर्जी ने पहली महिला मुख्य सचिव बनाकर क्यों चला बड़ा दांव

 

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लेते हुए 1994 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती को राज्य की नई मुख्य सचिव नियुक्त किया है। इसके साथ ही नंदिनी चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल की पहली महिला चीफ सेक्रेटरी बन गई हैं। अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे मनोज पंत का छह महीने का सेवा विस्तार 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया।

 

राज्य में मार्च–अप्रैल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इस नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

 

ममता की भरोसेमंद अफसर

 

नंदिनी चक्रवर्ती मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विश्वस्त अधिकारियों में गिनी जाती हैं। वे 2023 के अंत से राज्य की गृह सचिव की जिम्मेदारी निभा रही थीं। इससे पहले वे गृह विभाग की एसीएस, राज्यपाल की प्रधान सचिव और पर्यटन विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी जैसे अहम पदों पर रह चुकी हैं। जटिल परिस्थितियों में प्रशासनिक संतुलन साधने की उनकी क्षमता उन्हें मुख्यमंत्री के बेहद करीब लाती है।

 

बंगाली अस्मिता का संदेश

 

1 जून 1969 को जन्मीं नंदिनी चक्रवर्ती मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं। उनकी मातृभाषा बंगाली है, जबकि हिंदी और अंग्रेज़ी पर भी उनकी समान पकड़ है। उन्होंने जाधवपुर विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और भूगोल में एमए की डिग्री हासिल की है।

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब राज्य में भाषा और पहचान का मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है, ऐसे समय में एक बंगाली महिला अधिकारी को राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठाकर ममता बनर्जी ने साफ संदेश दिया है। यह फैसला प्रशासन के साथ-साथ चुनावी मैदान में भी असर डाल सकता है।

 

गृह सचिव बने जगदीश प्रसाद मीणा

 

नंदिनी चक्रवर्ती के मुख्य सचिव बनने के बाद उनकी जगह जगदीश प्रसाद मीणा को राज्य का नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है। चुनावी वर्ष में गृह विभाग की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, ऐसे में यह बदलाव भी खास मायने रखता है।

 

चुनावी साल में बड़ा दांव

 

इस साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी। मुकाबला एक बार फिर बीजेपी से होने की उम्मीद है। ऐसे में नंदिनी चक्रवर्ती को आगे कर ममता बनर्जी ने बंगाली अस्मिता, महिला नेतृत्व और अनुभवी प्रशासन—तीनों कार्ड एक साथ खेलने की कोशिश की है।

 

यह नियुक्ति न सिर्फ प्रशासनिक स्थिरता का संकेत है, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले ममता बनर्जी के राजनीतिक संदेश को भी मजबूती से सामने रखती है।

 

 

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