
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीति में अपने नवोन्मेषी और जनसंपर्कपूर्ण प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। 2009 में अपनी ‘विकास यात्रा’ के दौरान उन्होंने ऐसा ही एक ऐतिहासिक कदम उठाया, जब उन्होंने बरबीघी गांव, बेगूसराय में कैबिनेट की बैठक आयोजित की। यह पहल ‘सरकार आपके द्वार’ थीम के तहत की गई और इसे बिहार में किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा सामान्य गांव में की गई पहली कैबिनेट बैठक माना जाता है।
जनता के बीच उत्तरदायी शासन का संदेश
नीतीश कुमार ने यह दिखाने की कोशिश की कि शासन जनता के प्रति उत्तरदायी है। बैठक से एक दिन पहले उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने मोबाइल नंबर आम लोगों के सामने साझा करें ताकि किसी भी समस्या पर सीधे संपर्क किया जा सके। इस पहल ने आम जनता और प्रशासन के बीच एक नया संपर्क स्थापित किया।
सरसो के खेत के बगल में पंडाल, मंत्रियों ने किया पंगत में भोजन
बरबीघी गांव में मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के लिए पंडाल लगाया गया। बैठक स्थल के बगल में सरसो के खेत थे, जिससे प्राकृतिक वातावरण में यह ऐतिहासिक बैठक आयोजित हुई। बैठक में 18 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
अनोखी बात यह रही कि मंत्रियों और अफसरों ने जमीन पर बैठकर पंगत में भोजन किया, ताकि गांव की परंपरा का पालन किया जा सके और आम लोगों से जुड़ाव महसूस हो। लक्जरी बस में पटना से आए मंत्री बैठक के बाद वापस लौट गए, लेकिन यह कदम बिहार में प्रशासन और जनता के बीच दूरी को कम करने वाला माना गया।
नीतीश कुमार की यह पहल आज भी जनसंपर्क और शासन की पारदर्शिता के लिए मिसाल बनी हुई है।
