
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने वर्षों से बकाया भुगतान नहीं करने वाले आवंटियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 2607 बकायेदारों को अंतिम चेतावनी जारी की है। प्राधिकरण के अनुसार इन आवंटियों पर कुल 292 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। जीडीए ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि निर्धारित समय में बकाया राशि जमा नहीं की गई, तो संबंधित संपत्तियों का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर घर खाली कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
जीडीए के अधिकारियों के अनुसार, बकाया वसूली न होने के कारण विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है और प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति कमजोर होती जा रही है। इसी को देखते हुए अब बकायेदारों पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।
अंतिम बार ओटीएस योजना लाने पर विचार
जीडीए ने संकेत दिए हैं कि बकाया जमा कराने के लिए अंतिम अवसर के रूप में वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम लाने पर विचार किया जा रहा है। इस योजना के तहत आवंटियों को ब्याज में राहत देकर भुगतान का मौका दिया जाएगा।
हालांकि, जीडीए पहले भी दो बार ओटीएस स्कीम लागू कर चुका है। उस दौरान भारी ब्याज माफी और करोड़ों की छूट दी गई थी, इसके बावजूद 2607 आवंटी योजना का लाभ नहीं उठा सके।
शासन को भेजी गई बकायेदारों की सूची
जीडीए के उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने बताया कि बकायेदारों की पूरी सूची शासन को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि ओटीएस स्कीम आने की संभावना है, लेकिन इसके बाद भी यदि भुगतान नहीं हुआ तो अंतिम नोटिस जारी कर आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
10 साल से ज्यादा पुराने डिफॉल्टर सबसे अधिक
जीडीए द्वारा तैयार की गई सूची में बकायेदारों को भुगतान अवधि के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि अधिकांश डिफॉल्टर 10 साल से अधिक पुराने हैं।
प्राधिकरण के अनुसार—
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180 लोग ऐसे हैं जिन्होंने 10 साल से ज्यादा समय से भुगतान नहीं किया।
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316 बकायेदार 5 से 10 साल से भुगतान नहीं कर रहे।
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335 आवंटी 1 से 5 साल से किस्तें जमा नहीं कर सके।
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148 नए बकायेदार ऐसे हैं जिनका भुगतान एक साल तक रुका है।
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इसके अलावा 32 लोग ऐसे हैं जिन्होंने नक्शा पास कराने के नाम पर भुगतान रोक रखा है।
सीलिंग और संपत्ति जब्ती की तैयारी
जीडीए के प्रवर्तन दल ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रस्तावित ओटीएस योजना के बाद भी बकाया जमा नहीं किया गया, तो संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पहले नोटिस भेजा जाएगा, फिर आवास या भूखंड का आवंटन निरस्त कर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए आर-पार की रणनीति
जीडीए अब बकायेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और रुके हुए विकास कार्यों को गति देने की तैयारी में है। प्राधिकरण का कहना है कि बकाया राशि जमा न होने से विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं, इसलिए अब किसी को भी राहत नहीं दी जाएगी।
