गंगा किनारे खड़ा चुनार का किला: इतिहास, रहस्य और तिलिस्मी कहानियों का अनोखा संगम
मिर्जापुर, यूपी। गंगा के शांत बहाव के बीच कैमूर पर्वतमाला की चट्टानी चोटी पर खड़ा चुनार किला भारत के इतिहास का मौन लेकिन जीवंत प्रहरी है। वाराणसी से मात्र 34 किलोमीटर दूर यह किला न केवल अपनी रणकौशल क्षमता के लिए प्रसिद्ध रहा, बल्कि सदियों से यह पौराणिक कथाओं, रहस्यों और तिलिस्मी कहानियों का केंद्र भी बना हुआ है। एक समय कहा जाता था— “जो चुनार पर शासन करेगा, वही भारत पर शासन करेगा।” आज भी इसकी गलियों और पत्थरों से इतिहास की अनेक परतें झांकती हैं।
पौराणिक आस्था से उपजा ‘चुनार’ नाम
किले से जुड़ी कई किंवदंतियां आज भी लोगों की आस्था को मजबूत करती हैं। मान्यता है कि राजा बलि के यज्ञ में जब भगवान विष्णु ब्राह्मण के वेश में आए, तो उनके तीन पग भूमि में से पहला पग चुनार की पहाड़ी पर पड़ा था। यहां उनके चरणचिह्न आज भी पूजनीय हैं। इसी ‘चरणाद्रि’ नाम से कालांतर में ‘चुनार’ शब्द बना।
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