
नई दिल्ली: आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सेना अपनी निगरानी और खुफिया क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है। इसी दिशा में अब सेना को स्वदेशी सोलर पावर्ड ड्रोन मिलने जा रहे हैं, जो सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने में अहम भूमिका निभाएंगे। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत यह सौदा एक भारतीय स्टार्टअप कंपनी के साथ किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (NRT) को भारतीय सेना ने करीब 168 करोड़ रुपये के सोलर ड्रोन का ऑर्डर दिया है। ये ड्रोन सौर ऊर्जा से संचालित होंगे और खास तौर पर सर्विलांस के लिए तैयार किए गए हैं। सेना इन ड्रोन के जरिए उत्तर, पूर्वोत्तर और पश्चिमी सीमाओं पर अपनी निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी में है।
मध्यम ऊंचाई पर लगातार निगरानी की क्षमता
भारतीय सेना जिन सोलर ड्रोन को शामिल करने जा रही है, उन्हें मीडियम एल्टीट्यूड परसिस्टेंट सर्विलांस सिस्टम (MAPSS) कहा जाता है। ये ड्रोन मध्यम ऊंचाई पर उड़ते हुए लंबे समय तक बिना उतरे निगरानी कर सकते हैं। इन्हें रक्षा मंत्रालय के iDEX (Innovation for Defence Excellence) कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है।
सोलर ड्रोन की खासियत
सोलर ड्रोन पूरी तरह सौर ऊर्जा पर निर्भर होते हैं, जिससे इन्हें बार-बार ईंधन भरने या लैंडिंग की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक बार उड़ान भरने के बाद ये दिन-रात लगातार कई दिनों, यहां तक कि महीनों तक आसमान में मंडरा सकते हैं। इससे सेना को सीमावर्ती इलाकों में रियल टाइम इंटेलिजेंस, घुसपैठ, तस्करी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी मिल सकेगी।
दुश्मन की पकड़ से बाहर
MAPSS ड्रोन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये 5 किलोमीटर से 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं। सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण इनका शोर बेहद कम होता है और इनका थर्मल सिग्नेचर भी लगभग न के बराबर होता है, जिससे दुश्मन के रडार और निगरानी प्रणालियों के लिए इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।
इन ड्रोन का इस्तेमाल राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से लेकर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर के दुर्गम पहाड़ी व जंगली क्षेत्रों में आसानी से किया जा सकेगा, जहां लगातार निगरानी अब तक एक बड़ी चुनौती रही है।
सेना के लिए क्यों जरूरी हैं सोलर ड्रोन
सोलर ड्रोन हल्के होते हैं और इन्हें संचालित करने के लिए जमीन पर बड़े संसाधनों या भारी टीम की जरूरत नहीं होती। ये लंबे समय तक अपने मिशन पर बने रहते हैं और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ सिग्नल इंटेलिजेंस, खुफिया जानकारी जुटाने और दुर्गम इलाकों में संचार व्यवस्था को मजबूत करने में भी मददगार साबित होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोलर ड्रोन की तैनाती से भारतीय सेना की निगरानी क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव आएगा और सीमाओं की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।