
हर सफलता की कहानी मेहनत से शुरू होती है, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो संघर्ष, धैर्य और चुपचाप किए गए बलिदानों की मिसाल बन जाती हैं। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, सरगुजा निवासी पंकज कुमार यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो बताती है कि हालात कितने ही कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।
पंकज के पिता सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करते थे। आर्थिक तंगी थी, साधन सीमित थे, लेकिन सपने बड़े थे। पिता ने बेटे को हालात से लड़ना और सपनों की इज्जत करना सिखाया। इसी सीख ने पंकज को बार-बार गिरने के बाद भी उठकर चलने की ताकत दी।
पढ़ाई पूरी की, फिर शुरू हुआ अफसर बनने का सफर
पंकज ने 2014 में 12वीं पास की। इसके बाद 2017 में कंप्यूटर साइंस से BSc और 2019 में गणित से MSc की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई खत्म होते ही उन्होंने CGPSC (छत्तीसगढ़ स्टेट पीसीएस) की तैयारी शुरू कर दी। लक्ष्य साफ था—अफसर बनना, DSP बनना।
पहले दो प्रयासों में प्रीलिम्स भी नहीं निकला
2019 से उन्होंने परीक्षा फॉर्म भरना शुरू किया। पहले और दूसरे प्रयास में प्रीलिम्स तक पास नहीं कर पाए। यह किसी के भी आत्मविश्वास को तोड़ देने के लिए काफी था, लेकिन पंकज ने हार मानने से इनकार कर दिया।
तीसरे और चौथे प्रयास में उन्होंने इंटरव्यू तक का सफर तय किया, मगर पोस्ट नहीं मिली। हर नाकामी ने दर्द दिया, लेकिन हर असफलता ने उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत भी बनाया।
पांचवें प्रयास में मिली नौकरी, फिर भी नहीं छोड़ा सपना
पांचवें प्रयास में पंकज ने 90वीं रैंक हासिल की और उनका चयन स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर हो गया। यह बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उनका सपना अभी अधूरा था। DSP बनने की चाह ने उन्हें दोबारा पूरी ताकत से तैयारी में झोंक दिया।
छठे प्रयास में चमकी किस्मत, बने DSP
साल 2024 में छठे प्रयास में पंकज ने रैंक-14 हासिल कर ली। इसी के साथ उनका चयन डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) के पद पर हो गया। सब्जी के ठेले से लेकर वर्दी तक का उनका सफर हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया।
मेहनत, धैर्य और सही रणनीति बनी सफलता की कुंजी
पंकज का मानना है कि सफलता के लिए सिर्फ मेहनत नहीं, सही रणनीति भी जरूरी होती है। उन्होंने सिलेबस की गहरी समझ, स्टैंडर्ड किताबों का चयन, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण और महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर फोकस किया। सबसे अहम बात—असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेते रहे।
युवाओं के लिए संदेश
पंकज कुमार यादव की यह सफलता कहानी बताती है कि हालात आपकी मंजिल तय नहीं करते, आपकी सोच और मेहनत तय करती है। अगर इरादे मजबूत हों और धैर्य बना रहे, तो छठा प्रयास भी इतिहास रच सकता है।