Saturday, January 10

I-PAC पर ईडी का छापा: बंगाल की राजनीति में भूचाल, ममता बनर्जी को क्या मिलेगा फायदा?

 

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है। 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए अब केवल तीन महीने शेष हैं, और राज्य की राजनीति में टीएमसी और बीजेपी के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच I-PAC के कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापे ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

 

टीएमसी इस छापेमारी को ईडी का दुरुपयोग बताते हुए इसे चुनावी रणनीति की चोरी का मामला बना रही है। दूसरी ओर बीजेपी इसे ममता बनर्जी और उनके करीबी सहयोगियों से जुड़े भ्रष्टाचार का नया अध्याय बताकर चुनावी फायदा उठाने की कोशिश में है।

 

ममता बनर्जी बनें पहली मुख्यमंत्री जिन्होंने ईडी से भिड़ाव किया

कोलकाता में I-PAC के ऑफिस पर ईडी की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप किया। वह I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर से एक लैपटॉप और ग्रीन फाइल लेकर कार्यालय पहुंचीं, जहां ईडी की टीम छापेमारी कर रही थी। इस दौरान बिल्डिंग की लिफ्ट बंद रही और हंगामा लगभग पांच घंटे चला। यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने ईडी के छापे के दौरान सीधे तौर पर आमना-सामना किया।

 

अदालत में टकराव और राजनीतिक नैरेटिव

I-PAC पर छापे का मामला अब कलकत्ता उच्च न्यायालय तक पहुँच गया है। ईडी ने जांच में दखलअंदाजी के आरोप को चुनौती देने की अनुमति मांगी, जबकि टीएमसी ने छापे की वैधता पर सवाल उठाया। कोर्ट के निर्णय से पहले ही बंगाल में ममता बनर्जी बनाम अमित शाह का नैरेटिव गढ़ गया है।

 

टीएमसी इस घटना को चुनावी रणनीति की चोरी का मुद्दा बना रही है, जबकि बीजेपी इसे भ्रष्टाचार से जोड़ रही है। बीजेपी सांसद डॉ. संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने बंगाल को भारत के कानून से बाहर की जगह बना दिया है और आने वाले चुनाव में जनता उनके अराजक शासन का जवाब देगी।

 

बीजेपी की नई रणनीति और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

2021 विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी ने रणनीति बदली है। इस बार पार्टी व्यक्तिगत हमले की बजाय ममता बनर्जी सरकार के शासन, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बना रही है। I-PAC के कार्यालय पर ईडी के छापे में ममता बनर्जी की मौजूदगी को भी बीजेपी ने भ्रष्टाचार से जोड़ा है।

 

साथ ही, वाम दलों का रुख भी स्पष्ट है। CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक निजी कंसल्टेंसी कंपनी पर छापेमारी में उनका हस्तक्षेप उचित नहीं था। उन्होंने राजनीतिक मिलीभगत का आरोप भी लगाया।

 

अब सवाल यह है कि विधानसभा चुनाव के दौरान इस पूरे घटनाक्रम से राजनीतिक नुकसान किसे होगा और क्या ममता बनर्जी इसे अपने पक्ष में मोड़ पाएंगी।

 

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