
बीते साल सोने की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी ने जहां निवेशकों को चौंकाया, वहीं बैंकिंग सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला। नवंबर 2025 तक देश में गोल्ड लोन में 125 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह रफ्तार बैंकों के कुल कर्ज वितरण में हुई 11.5 फीसदी की वृद्धि से करीब 10 गुना अधिक है।
पिछले एक साल में सोने की कीमतों में करीब 62 फीसदी का उछाल आया है, जो लगभग चार दशक में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है। इसी तेजी के बीच लोग बड़ी संख्या में अपना सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने की ओर बढ़े हैं।
गोल्ड लोन का आकार 3.6 लाख करोड़ रुपये के पार
आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 तक बैंकों का कुल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 3.6 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। हालांकि कुल बैंक कर्ज में इसकी हिस्सेदारी अभी भी 2 फीसदी से कम है, लेकिन नए कर्जों में इसका योगदान 12 फीसदी तक पहुंच चुका है।
पिछले 12 महीनों में अकेले गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। इससे पहले भी गोल्ड लोन में 77 फीसदी की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
गोल्ड लोन में उछाल के तीन बड़े कारण
बैंक अधिकारियों के अनुसार, गोल्ड लोन में आई इस तेजी के पीछे तीन प्रमुख वजहें हैं—
- बैंकों की सुरक्षित कर्ज नीति:
मौजूदा आर्थिक माहौल में बैंक बिना गारंटी वाले कर्ज देने से बच रहे हैं और सुरक्षित लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- सोने की कीमतों में भारी उछाल:
सोना महंगा होने से लोगों की गिरवी रखी गई संपत्ति की वैल्यू बढ़ी है, जिससे वे पहले की तुलना में ज्यादा रकम का कर्ज ले पा रहे हैं।
- RBI के नए दिशानिर्देश:
रिजर्व बैंक के निर्देशों के बाद कुछ रिटेल लोन को अब गोल्ड लोन की श्रेणी में शामिल किया जा रहा है, जिससे आंकड़ों में तेज बढ़ोतरी दिख रही है।
MSME और गोल्ड लोन बने बैंक कर्ज की रीढ़
बैंकों के कर्ज वितरण में सबसे ज्यादा योगदान अब गोल्ड लोन और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) सेक्टर का है।
MSME सेक्टर का कुल बकाया कर्ज करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल बैंक लोन का लगभग 5 फीसदी है। लेकिन नए कर्जों में इसकी हिस्सेदारी भी 12 फीसदी तक पहुंच गई है।
FY26 में MSME लोन में 1.5 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि बैंक अब छोटे कारोबारियों और आम लोगों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
बड़ी कंपनियों से बैंक कर्ज दूर, रुझान में बड़ा बदलाव
आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि बड़ी कंपनियों का बैंक कर्ज लेने का रुझान कमजोर पड़ा है।
बड़ी कंपनियों का कुल बकाया लोन 28.7 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल बैंक लोन का 15 फीसदी है, लेकिन नए कर्जों में इनका हिस्सा महज 3.6 फीसदी रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी कंपनियां अब बैंक कर्ज के बजाय बॉन्ड मार्केट, आंतरिक कमाई या पुराने कर्ज चुकाने पर ज्यादा जोर दे रही हैं।
होम लोन और कमजोर वर्गों के कर्ज की रफ्तार धीमी
व्यक्तिगत कर्जों में भी बदलाव साफ नजर आ रहा है।
होम लोन कुल बकाया कर्ज का 16 फीसदी है, लेकिन नए कर्जों में इसका हिस्सा घटकर 14 फीसदी रह गया है।
वहीं कमजोर वर्गों को दिए जाने वाले कर्ज कुल नए कर्जों का सिर्फ 6 फीसदी ही रहे।
आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर बैंकिंग सिस्टम का फोकस
नवंबर 2025 तक देश में कुल बैंक कर्ज 195.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें सबसे तेज बढ़ोतरी व्यक्तिगत लोन में हुई है, जो कुल नए कर्जों का करीब 40 फीसदी हिस्सा रखते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम अब बड़ी कंपनियों के बजाय आम उपभोक्ताओं, छोटे कारोबारियों और सुरक्षित कर्ज की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इसका असर बैंकों की कमाई के साथ-साथ उनके जोखिम प्रबंधन पर भी साफ दिखाई देगा।