Sunday, January 25

सदानंद सिंह: बिहार की राजनीति का ‘हनक’ वाला कद्दावर नेता

पटना: बिहार की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह ने हमेशा अपनी स्पष्ट राजनीति और हनक के लिए अलग पहचान बनाई। 10 बार बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे सदानंद सिंह ने कांग्रेस को राज्य में अपने दम पर लंबे समय तक मजबूती दी। उनकी राजनीति में पार्टी के प्रति वफादारी और राजनीतिक सूझबूझ का अद्वितीय उदाहरण देखने को मिला। वर्ष 2022 में उनके निधन के साथ बिहार की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया।

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भागलपुर के कहलगांव विधानसभा क्षेत्र से 12 बार चुनाव लड़ने वाले सदानंद सिंह ने 9 बार जीत दर्ज की और विधानसभा चुनाव जीतने का यह रिकॉर्ड आज भी अपने आप में विशिष्ट है। साल 2015 में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।

सदानंद सिंह पहली बार 1969 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। 1985 में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया, फिर भी उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। इसके बाद 1990 और 1995 में जनता दल और 2005 में जेडीयू के उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने 1990-93 तक जिला कांग्रेस कमेटी, भागलपुर के अध्यक्ष पद और प्रदेश कांग्रेस कमेटी में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। लगभग 10 साल तक वे कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रहे और बिहार सरकार में सिंचाई एवं ऊर्जा राज्यमंत्री के रूप में सेवा दी।

2005 के विधानसभा चुनाव के बाद जब आरजेडी की सत्ता हिल चुकी थी, तब भी सदानंद सिंह ने कांग्रेस को अकेले राज्य चुनाव में उतरने की सलाह दी। 2009 के लोकसभा और 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन की संभावना थी, लेकिन सदानंद सिंह ने राज्य में अकेले दमखम से लड़ने की रणनीति अपनाई। उन्होंने गठबंधन में लगातार 70 सीटों की मांग की और अंततः कांग्रेस को यह सीटें मिलीं।

साल 2000 में बिहार विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह प्रोटेम स्पीकर बने। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस विधायकों को कुशलतापूर्वक व्यवस्थित किया। इसके चलते नीतीश कुमार की बहुमत साबित करने की योजना विफल हो गई और उन्होंने राज्यपाल से मिलकर इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राबड़ी देवी की अगुवाई में नई सरकार बनी और सदानंद सिंह को बिहार विधानसभा अध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ।

सदानंद सिंह की राजनीति में हनक, समझदारी और साहस का अद्वितीय मेल था। वह केवल कांग्रेस के नेता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी और काबिल नेताओं में से एक थे। उनका जाना न केवल कांग्रेस बल्कि पूरे बिहार राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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