पीड़िता की उम्र साबित करने को मार्कशीट पर्याप्त, ऑसिफिकेशन टेस्ट जरूरी नहीं: एमपी हाईकोर्ट
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि पीड़िता की नाबालिग होने की स्थिति विश्वसनीय दस्तावेजी प्रमाणों से सिद्ध हो जाती है, तो उम्र निर्धारण के लिए ऑसिफिकेशन टेस्ट (हड्डी जांच) कराना अनिवार्य नहीं है। हाईकोर्ट ने 13 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा।
यह फैसला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन ने सुनाया।
बचाव पक्ष ने उठाया था हड्डी जांच न होने का मुद्दा
मामले में बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि डॉक्टर द्वारा पीड़िता की हड्डी की जांच कराने की सलाह दी गई थी, लेकिन पुलिस ने ऑसिफिकेशन टेस्ट नहीं कराया। बचाव पक्ष का कहना था कि इस वजह से अभि...










