
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में रविवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब विशेष सुरक्षा वाहिनी में तैनात एक सिपाही को कुछ लोगों ने काली स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर ले जाने की घटना को अंजाम दिया। घटना के बाद इलाके में अपहरण की अफवाह फैल गई और सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हो गया। हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि यह कोई अपहरण नहीं, बल्कि राजस्थान पुलिस की कार्रवाई थी, जो सिपाही को एक पुराने फ्रॉड केस में गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई।
गिरफ्तार सिपाही की पहचान अखिलेश त्रिपाठी, निवासी विकासखंड, गोमतीनगर के रूप में हुई है, जो वर्तमान में विशेष सुरक्षा वाहिनी में सिपाही के पद पर तैनात हैं।
मंदिर से लौटते समय रोका, बातचीत में उलझाकर जबरन ले गए
परिजनों के अनुसार, रविवार सुबह करीब 9 बजे अखिलेश त्रिपाठी अपने दो बेटों अमोल और अगम के साथ शिव मंदिर में जल चढ़ाने गए थे। लौटते समय ग्वारी गांव के पास एक व्यक्ति ने उन्हें रोका और बातचीत में उलझा लिया। इसके बाद वह उन्हें पास खड़ी काली स्कॉर्पियो के पास ले गया, जहां पहले से मौजूद तीन लोगों ने अखिलेश को पकड़ लिया और जबरन गाड़ी में बैठाकर फरार हो गए।
बेटों ने शोर मचाकर उन्हें रोकने की कोशिश की और राहगीरों से मदद मांगी, लेकिन स्कॉर्पियो सवारों ने धमकाकर सभी को भगा दिया। घटना के बाद बेटों ने तुरंत अपनी मां आराधना त्रिपाठी को सूचना दी, जिन्होंने पुलिस को फोन कर जानकारी दी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई अपहरण की खबर, पुलिस हुई सतर्क
घटना की सूचना मिलते ही गोमतीनगर पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके में जांच शुरू की। इस दौरान सोशल मीडिया पर गोमतीनगर से अपहरण की खबर तेजी से वायरल हो गई, जिससे क्षेत्र में तनाव और भय का माहौल बन गया।
आराधना त्रिपाठी ने बताया कि स्कॉर्पियो सवारों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया था। घटना के बाद एक फोन कॉल भी आया, जिसमें कहा गया कि अखिलेश को भगा दो, नहीं तो उसे उठा लिया जाएगा। इस कॉल ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी।
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज, राजस्थान पुलिस की कार्रवाई निकली
गोमतीनगर पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें अपहरण जैसी कोई संदिग्ध घटना की पुष्टि नहीं हुई। जांच में संकेत मिले कि स्कॉर्पियो किसी राजस्थान पुलिस की टीम की हो सकती है।
इसके बाद लखनऊ के विभिन्न थानों को अलर्ट किया गया और जांच आगे बढ़ाई गई। जल्द ही स्पष्ट हो गया कि अखिलेश त्रिपाठी को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है, क्योंकि वह राजस्थान के गंगापुर थाने में दर्ज 2002 के फ्रॉड केस में वांछित थे।
25 हजार का इनाम, गैर-जमानती वारंट भी था जारी
पुलिस के अनुसार, अखिलेश त्रिपाठी पर वर्ष 2002 के एक धोखाधड़ी मामले में 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। साथ ही उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि उस समय अखिलेश एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे और इसी दौरान उन पर धोखाधड़ी के आरोप लगे थे।
प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप, राजस्थान पुलिस को भेजा जाएगा नोटिस
गोमतीनगर इंस्पेक्टर ब्रजेश चंद्र तिवारी ने बताया कि राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान स्थानीय पुलिस को कोई सूचना नहीं दी, जो कानून और पुलिस प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजस्थान पुलिस को नोटिस भेजा जाएगा और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई से उठे सवाल, शहर में फैली दहशत
इस घटना ने पुलिस कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना सूचना के किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान से उठाने की कार्रवाई ने आम लोगों में डर और भ्रम पैदा कर दिया। वहीं, अपहरण की अफवाह ने कुछ समय के लिए पूरे इलाके को हिला कर रख दिया।
