
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस विभाग के भीतर भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने पूरी एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) टीम को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई में एसओजी प्रभारी सहित कुल आठ पुलिसकर्मी शामिल हैं। इन पर एक कबाड़ी से 30 हजार रुपये वसूलने और कबाड़ जब्त कर अवैध रूप से रोकने का गंभीर आरोप लगा है।
एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए जाने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया। निलंबन के बाद एसओजी की जिम्मेदारी अब बोबिंद्र शर्मा को सौंप दी गई है।
रात में रोका कबाड़ी पिता-पुत्र का वाहन
जानकारी के अनुसार, मुरादाबाद के बिलारी निवासी कबाड़ी जफरूद्दीन अपने बेटे आस मोहम्मद के साथ 2 फरवरी की रात मोबाइल की प्लेट का कबाड़ लेकर संभल के लाडम सराय की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एसओजी टीम ने उनकी बाइक को रोक लिया और दोनों को पकड़कर चौधरी सराय पुलिस चौकी ले जाया गया।
छोड़ने के बदले 30 हजार की वसूली का आरोप
कबाड़ी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें छोड़ने के एवज में 30 हजार रुपये की वसूली की। इतना ही नहीं, मोबाइल की प्लेट गलाने के बाद निकलने वाली धातु को भी एसओजी टीम ने अपने पास रख लिया।
कबाड़ी पिता-पुत्र को रात में तो छोड़ दिया गया, लेकिन अगले दिन यानी 3 फरवरी को उन्होंने धातु वापस मांगने के लिए टीम से संपर्क किया।
धातु लौटाने के लिए मांगे 40 हजार रुपये
पीड़ित कबाड़ी का दावा है कि जब उन्होंने धातु वापस मांगने की बात कही तो एसओजी टीम ने बदले में 40 हजार रुपये की मांग की। जबकि धातु की कुल कीमत भी लगभग 40 हजार रुपये ही बताई जा रही थी। इसके बाद यह मामला एसपी तक पहुंचा और शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई।
जांच में आरोप सही पाए गए, आठ पुलिसकर्मी सस्पेंड
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि शिकायत की जांच कराई गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद एसओजी प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में—
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एसओजी प्रभारी एसआई मोहित चौधरी
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हेड कांस्टेबल कुलवंत
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हेड कांस्टेबल अरशद
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कांस्टेबल अजनबी
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कांस्टेबल आयुष
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कांस्टेबल विवेक
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कांस्टेबल बृजेश
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कांस्टेबल हिरेश
शामिल हैं।
एसपी ने दिया स्पष्ट संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। एसपी ने स्पष्ट किया कि जिले में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
