Tuesday, March 3

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ममता बनर्जी बनीं सुप्रीम कोर्ट में वकील, चुनाव आयोग पर लगाया आरोप
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ममता बनर्जी बनीं सुप्रीम कोर्ट में वकील, चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इतिहास रचते हुए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद ही अपनी याचिका की पैरवी की। यह पहली बार है जब किसी प्रदेश की मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में सीधे जुबानी दलीलें पेश की हैं। ममता बनर्जी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले में चुनाव आयोग द्वारा राज्य में की जा रही कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट की सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने उनकी दलील सुनने के बाद चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर सोमवार तक जवाब दाखिल करने को कहा। खुद की पैरवी करते हुए ममता की दलील ममता ने अदालत में कहा कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य नाम जोड़ने के लिए नहीं बल्कि हटाने के लिए है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी के बाद अपने पति का सरनेम अपनाने वाली महिलाएं और अपने ससुराल शिफ्ट होने वाले लोग नाम कटने की समस्या का शिकार हो रहे हैं। ममता ने कहा,"जब सब...
मोहम्मद दीपक विवाद: हैसियत देखकर क्यों बदल गई हैं भावनाएं?
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मोहम्मद दीपक विवाद: हैसियत देखकर क्यों बदल गई हैं भावनाएं?

उत्तराखंड के कोटद्वार में एक मामूली घटना ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से वायरल हुए कंटेंट ने देशभर में बहस छेड़ दी है। विरोध करने वालों के मुताबिक, एक मुस्लिम दुकानदार को ‘बाबा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह उसके धर्म से मेल नहीं खाता और इससे “भावनाएं आहत” होती हैं। लेकिन सवाल उठता है—क्या भावनाएं केवल हैसियत और धर्म के आधार पर आहत होती हैं? बनारस में ‘बाबा’ शब्द का अर्थ किसी बेटे के लिए पिता और पोते के लिए दादा के साथ जुड़ा होता है। काशी में ‘बाबा’ का मतलब केवल काशी विश्वनाथ और संगम तट पर मेले से होता है। यह शब्द भाषा, संस्कृति और भूगोल की सीमाओं से परे सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक है। भारत से लेकर मध्य एशिया तक, ‘बाबा’ शब्द हर जगह मौजूद है—कभी रिश्तों में, कभी सूफी संतों में, कभी सांस्कृतिक प्रतीकों में। इस घटना की तात्कालिक वजह 26...
भारत का बढ़ता कद, फीके पड़े ट्रंप के तेवर – अमेरिका ने टैरिफ घटाकर दी राहत
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भारत का बढ़ता कद, फीके पड़े ट्रंप के तेवर – अमेरिका ने टैरिफ घटाकर दी राहत

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 18% तक घटा दिया, जो केवल व्यापारिक रियायत नहीं, बल्कि भारत की बदलती कूटनीतिक स्थिति और वैश्विक शक्ति संतुलन में उसकी केंद्रीय भूमिका का संकेत है। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को तत्काल राहत मिली है, जबकि ऊर्जा आयात और टैरिफ बाधाओं में संतुलन बनाए रखने की शर्तें भी जुड़ी हैं। विश्लेषकों के अनुसार यह निर्णय ऐसे समय आया है जब भारत ने यूरोपीय संघ के साथ बहुपक्षीय ‘गोल्डन डील’ को अंतिम रूप दिया है, BRICS की अध्यक्षता संभाली है और QUAD मंच पर अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दी है। इन सब घटनाओं ने अमेरिका को यह स्वीकार करने पर मजबूर किया कि भारत अब केवल एक उभरता बाजार नहीं, बल्कि एक अनिवार्य रणनीतिक साझेदार है। भारत-EU डील और अमेरिका पर दबाव:भारत और यूरोपीय संघ के समझौते से भारत को टेक्सटाइल्स, फार्मा, डिजिटल सेवाओं...
‘सरकार कह रही किताब है ही नहीं’, राहुल गांधी बोले- पीएम मोदी को नरवणे की बुक भेंट करूंगा
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‘सरकार कह रही किताब है ही नहीं’, राहुल गांधी बोले- पीएम मोदी को नरवणे की बुक भेंट करूंगा

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे की किताब का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष के दौरान तत्कालीन आर्मी चीफ को संदेश दिया था – “जो उचित समझो, वो करो”। राहुल गांधी ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री लोकसभा में आते हैं, तो मैं उन्हें स्वयं नरवणे जी की किताब भेंट करूंगा, ताकि वे इसे पढ़ें और देश को सच्चाई का पता चल सके।” पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने बताया कि सरकार और लोकसभा स्पीकर इस किताब के अस्तित्व से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह नरवणे जी की किताब है, जिसमें पूरी घटना का विवरण है। सबसे अहम बात यही है कि पीएम ने सेना प्रमुख को कहा – ‘जो उचित समझो, वो करो’। जब चीनी टैंक कैलाश रिज तक पहुँच गए, तो नरवणे जी ने तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फो...
संसद के गेट पर राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू में तीखी बहस, ‘गद्दार दोस्त’ से ‘देश का दुश्मन’ तक का जुबानी जंग
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संसद के गेट पर राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू में तीखी बहस, ‘गद्दार दोस्त’ से ‘देश का दुश्मन’ तक का जुबानी जंग

नई दिल्ली: संसद के भीतर जारी हंगामे के बीच बुधवार को संसद के बाहर भी चर्चा का माहौल गर्म हो गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच संसद गेट पर तीखी बहस देखने को मिली। 'गद्दार दोस्त' से 'देश का दुश्मन' तक एनआई समाचार एजेंसी के अनुसार, जब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू मकर द्वार से गुजर रहे थे और प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसदों के पास पहुंचे, तब राहुल गांधी ने उनके लिए टिप्पणी करते हुए कहा, "नमस्कार भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस आओगे।" इसके जवाब में केंद्रीय राज्य मंत्री बिट्टू ने कहा, "देश का दुश्मन…" दोनों नेताओं के बीच हाथ मिलाने का प्रयास और जवाबी टिप्पणी भी देखने को मिली, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई। लोकसभा में हंगामा जारी वहीं, लोकसभा के अंदर भी विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और हंगामे के कारण बैठक शुरू होने के सिर्फ ...
टैरिफ और सीजफायर की गुगली पर खुद ही क्लीन बोल्ड हुए डोनाल्ड ट्रंप
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टैरिफ और सीजफायर की गुगली पर खुद ही क्लीन बोल्ड हुए डोनाल्ड ट्रंप

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले 10 महीनों में भारत के साथ संबंधों में तनाव पैदा करने से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन आखिरकार भारत और अमेरिका के मंत्रियों, राजनयिकों, सांसदों और अधिकारियों ने ऐसा आधार तैयार किया कि ट्रंप को भी टैरिफ घटाकर 18% करने और व्यापार समझौते की घोषणा करनी पड़ी। अचानक फोन और दुनिया चौंकी ट्रंप ने अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत कर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ऐलान किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप ने भारत के खिलाफ कई बार खीझ दिखाई थी और 50% टैरिफ लगाने के बावजूद अमेरिकी सांसदों के दबाव के बावजूद कड़ी रुख अपनाए रखा। लेकिन सवाल यह था—क्या यह डील अचानक हुई, या दोनों देशों के बीच लंबी चर्चाओं और समझदारी का नतीजा थी? 10 महीने की कूटनीतिक तैयारी मई 2025 से फरवरी 2026 तक, दोनों देशों ने आपसी संबंध बनाए रखने और भविष्य के रोड मैप तैय...
साइलेंट इंडिकेशन: खेल-खेल में बारूद पहचानना सीखते हैं ITBP के ‘कॉम्बैट डॉग्स’
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साइलेंट इंडिकेशन: खेल-खेल में बारूद पहचानना सीखते हैं ITBP के ‘कॉम्बैट डॉग्स’

नई दिल्ली: वह महज तीन महीने का था जब पहली बार उसे ‘वर्दी’ वाले इंसानों के बीच लाया गया। न उसे सरहदों का मतलब पता था, न बारूद की गंध का अंदाजा। लेकिन आज वही ‘रेमो’ (परिवर्तित नाम) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का एक ऐसा जांबाज योद्धा बन चुका है, जिसके लिए विस्फोटक ढूंढना किसी खेल से कम नहीं। रेमो की कहानी उन सैकड़ों कॉम्बैट डॉग्स की झलक है, जिन्हें सेना और अर्धसैनिक बलों में इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि वे मौत को मात देने वाले मिशनों में सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। नौ महीने की कठिन ट्रेनिंग के बाद बना विस्फोटक खोजी कुत्ता रेमो के हैंडलर ने बताया कि उसकी पहली तैनाती छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में की गई थी, जहां जमीन के नीचे दबे आईईडी (IED) जवानों के लिए सबसे बड़ा खतरा होते हैं। हैंडलर के अनुसार, “रेमो ने अपनी सूंघने की क्षमता से कई बार सुरक्षा बलों का रास्ता स...
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: समझौता तो हुआ, लेकिन अब भी हैं बड़ी चुनौतियाँ
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: समझौता तो हुआ, लेकिन अब भी हैं बड़ी चुनौतियाँ

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न ट्रेड डील दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने का अवसर देती है। लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या यह समझौता लंबे समय तक स्थिर और संतुलित संबंध बनाए रख पाएगा। डील का महत्व इस समझौते का महत्व कम करके नहीं आंका जा सकता। डील भारत और अमेरिका को तुरंत आने वाले आर्थिक संकट से बचाने में मदद करेगी। भारत ने अपनी सबसे अहम रणनीतिक साझेदारी में बाधा डालने वाली समस्याओं को दूर किया है। सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ पहला मुद्दा: भारत-पाकिस्तान संबंधअमेरिका का रवैया पाकिस्तान के प्रति और ट्रंप का पाकिस्तान के साथ दोस्ताना बढ़ाना भारत के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी करता है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने व्यापारिक गतिरोध दूर करने में अहम भूमिका निभाई है। अब देखना होगा कि वे भारत और पाकिस्तान के बीच संतुलन बनाकर चल पाएंगे या नहीं। भारत हमेशा से द्विपक्षीय बातचीत ...
जवानी जेल में गुजर रही: दिल्ली की जेलों में आधे से अधिक कैदी 30 साल से कम उम्र के
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जवानी जेल में गुजर रही: दिल्ली की जेलों में आधे से अधिक कैदी 30 साल से कम उम्र के

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों की उम्र को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। जिस उम्र में युवाओं को शिक्षा और करियर पर ध्यान देना चाहिए, उस उम्र में हजारों युवा जेलों में अपना समय बिता रहे हैं। आंकड़े क्या कहते हैं? दिल्ली की 16 जेलों में कुल 18,969 कैदी हैं। इनमें से 9,434 कैदी (लगभग 50%) की उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है। 31 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के कैदी: 7,222 18 से 20 वर्ष के कैदी: 1,104 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के कैदी: 167 इस प्रकार कुल कैदियों में से 55% से अधिक की उम्र 30 साल से कम है। प्रत्येक 10 में से 7 कैदी 50 वर्ष से कम आयु के हैं। राष्ट्रीय और विदेशी कैदी कुल कैदियों में से 18,248 (96%) भारतीय नागरिक हैं। विदेशी कैदियों की संख्या कम है, जिनमें अधिकांश नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में शामिल हैं। विचाराधीन बनाम ...
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: जानें डील से जुड़े सभी सवाल और जवाब
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: जानें डील से जुड़े सभी सवाल और जवाब

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न व्यापार समझौते को सरकार उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं विपक्षी दल कई सवाल उठा रहे हैं। ट्रेड डील से जुड़े अहम सवालों और उनके जवाब इस प्रकार हैं। भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्या तय हुई? अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाएगा। भारत की तरफ से वाणिज्य और कृषि मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि संवेदनशील सेक्टरों, खासकर कृषि और डेयरी के हित सुरक्षित रखे गए हैं। डील कब से लागू होगी? ट्रंप ने कहा है कि 18% टैरिफ तुरंत लागू होगा। हालांकि, अमेरिकी नियमों के मुताबिक इसके लिए औपचारिक सरकारी आदेश जारी होना जरूरी है। भारत सरकार के अनुसार, दोनों देशों की टीमें डील के तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दे रही हैं। ‘फाइनल अंडरस्टैंडिंग’ के बाद संयुक्त बयान के साथ लागू होने की तारी...