Wednesday, February 4

टैरिफ और सीजफायर की गुगली पर खुद ही क्लीन बोल्ड हुए डोनाल्ड ट्रंप

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले 10 महीनों में भारत के साथ संबंधों में तनाव पैदा करने से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन आखिरकार भारत और अमेरिका के मंत्रियों, राजनयिकों, सांसदों और अधिकारियों ने ऐसा आधार तैयार किया कि ट्रंप को भी टैरिफ घटाकर 18% करने और व्यापार समझौते की घोषणा करनी पड़ी।

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अचानक फोन और दुनिया चौंकी

ट्रंप ने अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत कर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ऐलान किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप ने भारत के खिलाफ कई बार खीझ दिखाई थी और 50% टैरिफ लगाने के बावजूद अमेरिकी सांसदों के दबाव के बावजूद कड़ी रुख अपनाए रखा।

लेकिन सवाल यह था—क्या यह डील अचानक हुई, या दोनों देशों के बीच लंबी चर्चाओं और समझदारी का नतीजा थी?

10 महीने की कूटनीतिक तैयारी

मई 2025 से फरवरी 2026 तक, दोनों देशों ने आपसी संबंध बनाए रखने और भविष्य के रोड मैप तैयार करने पर लगातार काम किया। ट्रंप का उद्देश्य था सीजफायर में श्रेय लेने का, लेकिन जब भारत ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, तो उन्होंने संबंधों को दांव पर लगाना शुरू कर दिया।

बैठकों का दौर और क्वाड की भूमिका

दोनों देशों के संबंध बनाए रखने के लिए आधिकारिक बैठकों का दौर कभी नहीं रुका। इसमें क्वाड (Quad) वर्किंग ग्रुप की बैठकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • अमेरिकी सांसद भारत दौरे पर आए।

  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और डिप्टी NSA पवन कपूर अमेरिका गए।

  • IT मंत्री अश्विनी वैष्णव भी वॉशिंगटन में क्रिटिकल मिनरल्स पहल में शामिल हुए।

सर्जियो गोर ने काम आसान बनाया

भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की नियुक्ति ने स्थिति को और सकारात्मक बनाया। उनकी सीधी पहुंच और कूटनीतिक प्रभाव से अमेरिकी सांसदों और मंत्रियों की भारत यात्रा आसान हुई। ट्रेड डील की घोषणा से ठीक पहले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों ने भारत में रणनीतिक और आर्थिक चर्चाओं को अंजाम दिया।

राजनयिकों और अधिकारियों ने डील का आधार तैयार किया

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों ने विदेश मंत्री, रक्षा सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और बिजनेस लीडर्स के साथ चर्चा कर डील को अंतिम रूप देने का आधार तैयार किया। अमेरिकी सांसदों ने कहा—“अमेरिका भारत को प्रमुख रक्षा सहयोगी के रूप में देखता है।”

ट्रंप खुद हुए क्लीन बोल्ड

अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्य भारत आए और व्यापारिक, रक्षा और उद्योग क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की। इसके बाद ट्रंप ने जो डील का ऐलान किया, वह उनके मंत्रियों और अधिकारियों की रणनीति और मेहनत का नतीजा थी। पुराने नैरेटिव, टैरिफ और सीजफायर की दलीलों के बावजूद, ट्रंप को अपने रुख से पीछे हटना पड़ा।

नतीजा: भारत ने कूटनीतिक चतुराई और लगातार वार्ता के दम पर अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौता हासिल किया, जबकि ट्रंप के पुराने रुख पूरी तरह फीके पड़ गए।

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