Sunday, June 21

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भिंड का बेटा बना मिसाल: पिता-भाई के साथ जेल, घर जलाया गया, ड्रिप लगाकर दी परीक्षा… अब बने DSP

भोपाल/भिंड। कहते हैं, कठिनाइयाँ इंसान को तोड़ भी देती हैं और गढ़ भी देती हैं। भिंड जिले के जैनेंद्र निगम ने विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताक़त बनाया और वह मंज़िल हासिल की, जिसे कई लोग सिर्फ़ सपना समझते हैं। हत्या के आरोप में पिता और भाई के साथ जेल जाना पड़ा, घर जला दिया गया, आर्थिक स्थिति चरमरा गई, स्वास्थ्य बिगड़ गया—लेकिन जैनेंद्र न टूटे, न रुके। आज वे MPPSC परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए DSP के पद पर चयनित हुए हैं।

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12वीं रैंक, सिर ऊँचा कर दिया
MPPSC परिणाम में जैनेंद्र ने 12वीं रैंक हासिल की, जो उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की अमिट कहानी बयान करती है। सफलता के बाद उन्होंने कहा—

“मेरे मन में किसी के खिलाफ बदले की भावना नहीं है। बस अपने परिवार में खुशी लौटाना चाहता हूं। पिता का सपना पूरा हुआ, यही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है।”

झूठी FIR, जेल और घर जलाने का दर्द
जैनेंद्र के जीवन में तूफ़ानों की शुरुआत तब हुई, जब गांव में जमीन विवाद के चलते कुछ लोगों ने उनके परिवार को निशाना बनाया। उनके पिता, भाई और उन पर झूठे केस दर्ज किए गए। स्थिति इतनी भयावह हुई कि हमले के बाद उनका घर लूट लिया गया और जला दिया गया। इसी मामले में तीनों को जेल भेज दिया गया।

जनवरी 2021 में जमानत मिली और अगस्त 2024 में कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। लेकिन तब तक परिवार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से टूट चुका था।

मलेरिया-टाइफाइड के बीच परीक्षा
परिवार की हालत सुधारने और सपने को बचाए रखने के लिए जैनेंद्र रिश्तेदारों की मदद से इंदौर पहुंचे और तैयारी शुरू की। लेकिन संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। एक एक्सीडेंट में उनकी मां और भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। मेन्स परीक्षा के समय उन्हें मलेरिया और टाइफाइड हो गया।

हालत इतनी खराब थी कि डॉक्टरों ने IV ड्रिप लगाना जरूरी बताया। जैनेंद्र हर सुबह-शाम ड्रिप लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचते रहे और पेपर देते रहे।

कठिनाइयों के आगे झुकने से किया इंकार
कई लोग हार मान लेते, लेकिन जैनेंद्र ने नहीं। उन्होंने कहा—

“मुश्किलें मेरे रास्ते में थीं, लेकिन मैंने उनसे भागने के बजाय लड़ने का फैसला किया।”

गाँव के युवाओं के लिए प्रेरणा
आज जैनेंद्र का संघर्ष उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने दिखा दिया कि संकल्प, मेहनत और धैर्य के साथ कोई भी बाधा मंज़िल के आगे टिक नहीं सकती।

उनकी कहानी यह संदेश देती है—

“हज़ार आंधियां उठें, पर जो खिलने का इरादा रखते हैं, वे खिलकर ही रहते हैं।”

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