
काठमांडू / सिलीगुड़ी: नेपाल के 5 मार्च के राष्ट्रीय चुनाव से पहले चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को बड़ा झटका लगा है। नेपाल में प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार बालेन शाह ने झापा क्षेत्र में चीन-नेपाल फ्रेंडशिप इंडस्ट्रियल पार्क को अपने चुनावी घोषणा पत्र से हटा दिया। यह प्रोजेक्ट पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में शुरू किया गया था और इसमें अरबों रुपये का निवेश शामिल है।
बालेन शाह का कदम: ओली के खिलाफ प्रत्यक्ष मुकाबला
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बालेन शाह, जो नेपाल के युवा नेताओं में जाना-माना चेहरा हैं और काठमांडू के पूर्व मेयर भी रह चुके हैं, ने ओली के चीन समर्थित प्रोजेक्ट को चुनावी मंच से बाहर कर ओली के राजनीतिक दावों को चुनौती दी।
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इंडस्ट्रियल पार्क झापा-5 में आता है, जो ओली का अपना निर्वाचन क्षेत्र है।
चीन और नेपाल का BRI प्रोजेक्ट
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दिसंबर 2024 में ओली और चीन ने BRI सहयोग फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें झापा स्थित इंडस्ट्रियल पार्क भी शामिल था।
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यह प्रोजेक्ट नेपाल-चीन दोस्ती और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास का प्रतीक माना जा रहा था।
भारत की सुरक्षा चिंता
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झापा इंडस्ट्रियल पार्क सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन नेक) के नजदीक स्थित है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश से जोड़ता है।
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भारत की सुरक्षा दृष्टि से इस इलाके में चीन का निर्माण संवेदनशील माना जाता है। नेपाल में स्थानीय अधिकारियों ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि भारत ने प्रोजेक्ट को अनुमति न देने की सलाह दी है।
विरोध पर राजनीति और विदेशी दबाव
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प्रोजेक्ट के चेयरमैन गोविंदा थापा ने कहा कि बालेन शाह की नीति विदेशी ताकतों से प्रेरित लगती है, जिसका इशारा भारत की तरफ है।
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थापा ने जोर देकर कहा कि इंडस्ट्रियल पार्क का उद्देश्य केवल स्थानीय उद्योग और रोज़गार बढ़ाना है, न कि किसी सैन्य या संवेदनशील गतिविधि के लिए।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
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नेपाल के पूर्व वित्त और विदेश मंत्री प्रकाश शरण महत ने भी कहा कि भारत पूर्व बॉर्डर के पास किसी भी विदेशी निर्माण से सुरक्षा चिंता व्यक्त कर सकता है।
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बालेन शाह का कदम नेपाल में चीन विरोधी और भारत समर्थक नीति का संकेत देता है, जिससे भारत को रणनीतिक राहत मिली है।
निष्कर्ष
बालेन शाह का चुनावी निर्णय न केवल ओली और चीन के BRI प्रोजेक्ट के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि भारत के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण राहत भी प्रदान करता है। नेपाल में चीन विरोधी रुझान के बढ़ने से भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों को समर्थन मिलेगा।
