
दोहा / इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अचानक कतर के दौरे पर पहुँच गए हैं। यह कदम अफगानिस्तान में पाकिस्तानी वायुसेना के हवाई हमले के बाद बढ़ते तनाव और तालिबानी सेना के संभावित जवाबी हमले के डर के बीच उठाया गया है।
हवाई हमले और टीटीपी का खतरा
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पाकिस्तानी वायुसेना ने हाल ही में अफगानिस्तान में हवाई हमला किया, जिसमें एक ही परिवार के 17 लोग मारे गए।
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खुफिया सूत्रों का दावा है कि इस हमले में TTP के बड़े कमांडर को नहीं मार पाए, जिससे तालिबानी पलटवार का खतरा बढ़ गया।
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डूरंड लाइन के पास तालिबानी सैनिकों का जमावड़ा नजर आ रहा है।
कतर से क्या उम्मीद है पाकिस्तान को?
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पाकिस्तान चाहता है कि कतर अपनी मध्यस्थता का इस्तेमाल करके तालिबान को पलटवार रोकें।
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पाकिस्तानी अधिकारी और नवाज शरीफ के करीबी नजम सेठी का दावा है कि कतर टीटीपी का समर्थन कर रहा है।
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अलजजीरा चैनल की रिपोर्टिंग पर भी पाकिस्तानी पक्ष ने आपत्ति जताई है, जिसमें इसे आतंकियों के पक्ष में दिखाया गया।
कतर और पाकिस्तान के बीच तल्खी
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पाक-कतर संबंध दशकों पुराना है, लेकिन हाल के वर्षों में रक्षा और ऊर्जा समझौतों के चलते दोनों के रिश्तों में तल्खी बढ़ी है।
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पाकिस्तान कतर से वादे के मुताबिक एलएनजी खरीद नहीं कर रहा, जिससे द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण बने।
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शहबाज शरीफ की दोहा यात्रा का उद्देश्य तालिबान को पलटवार से रोकने और रिश्ते सुधारने के लिए है।
शहबाज की कतर यात्रा का एजेंडा
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शहबाज शरीफ कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात करेंगे।
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बातचीत में अफगानिस्तान में हवाई हमले, गाजा पीस प्लान, अमेरिका-ईरान तनाव और अन्य क्षेत्रीय मुद्दे शामिल होंगे।
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यह शहबाज की पिछले 5 महीनों में तीसरी कतर यात्रा है, जो पाकिस्तान में बढ़ती चिंता और घबराहट को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
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विश्लेषकों का कहना है कि शहबाज का दौरा तालिबानी सेना के संभावित जवाबी हमले और TTP की बढ़ती गतिविधियों से निपटने के लिए रणनीतिक कदम है।
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पाकिस्तान कतर से चाहता है कि वह काबुल को तालिबान के हमले से रोके, ताकि सीमा और आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव न पड़े।
