Tuesday, February 24

पीएम मोदी के लिए इजरायल की संसद में घमासान: विपक्ष ने बहिष्कार का ऐलान, भारत का विरोध नहीं

तेल अवीव: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे से पहले नेसेट (इजरायली संसद) में विवाद मच गया है। विपक्षी पार्टियों ने ऐलान किया है कि वे प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का बहिष्कार करेंगी, जिससे नेतन्याहू सरकार के लिए असहज स्थिति उत्पन्न हो गई है।

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विपक्ष के इस कदम के पीछे सुप्रीम कोर्ट के प्रेसीडेंट यित्ज़ाक अमिक को विशेष सत्र में शामिल न करने का मामला है। विपक्ष का कहना है कि नेतन्याहू सरकार सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख को नजरअंदाज कर रही है, इसलिए उनके लिए पीएम मोदी के भाषण में शामिल होना संभव नहीं।

विपक्ष भारत विरोधी नहीं

हालांकि विपक्ष ने साफ किया है कि यह कदम भारत या पीएम मोदी के विरोध में नहीं है। इजरायली नेता यायर लैपिड ने एक्स पर लिखा कि “हम सेशन में रहना चाहते हैं, हमें सुप्रीम कोर्ट के प्रेसीडेंट को बुलाने का पक्का आश्वासन चाहिए ताकि हम हिस्सा ले सकें। हमारा उद्देश्य भारत को शर्मिंदा करना नहीं है।”

इस विवाद के कारण प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के दौरान संसद में आधी सीटें खाली रहने का खतरा है। इसे रोकने के लिए स्पीकर आमिर ओहाना ने पूर्व सांसदों को बुलाने की योजना बनाई है, ताकि भाषण का सही मंच बने।

विपक्ष के बहिष्कार पर उठे सवाल

विशेषज्ञों ने कहा कि पहले अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद को संबोधित किया था, लेकिन तब विपक्ष ने बहिष्कार नहीं किया था। विपक्ष के इस कदम को घरेलू राजनीतिक मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे भारत विरोधी न मानकर इसे सुप्रीम कोर्ट के मुद्दे तक सीमित कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट चीफ को लेकर विवाद

जनवरी 2025 में यित्ज़ाक अमिक को सुप्रीम कोर्ट का प्रेसीडेंट चुने जाने के बाद से नेतन्याहू सरकार और अन्य मंत्रियों के बीच विवाद चल रहा है। न्यायिक अधिकारियों की अधिकारिक मान्यता को लेकर टकराव के चलते उन्हें नेसेट के कई कार्यक्रमों से बाहर रखा गया, जिनमें दुनिया के अन्य नेताओं के भाषण भी शामिल थे। इस पृष्ठभूमि में पीएम मोदी का संबोधन विपक्ष के बहिष्कार के कारण असामान्य स्थिति में आ गया है।

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