
नई दिल्ली: धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की लार्जर बेंच 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू करेगी। इन मामलों में सबरीमला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं की एंट्री, मुस्लिम महिलाओं का मस्जिद में प्रवेश, और पारसी महिलाओं के दूसरे समुदाय से शादी के बाद अधिकार शामिल हैं।
सुनवाई की प्रक्रिया और समयसीमा
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चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि सुनवाई 22 अप्रैल तक पूरी होने की संभावना है।
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सभी पक्षकारों से 14 मार्च तक लिखित प्रतिवेदन मांगे गए हैं।
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यह याचिकाओं का समूह लार्जर बेंच को रेफर किया गया था।
सबरीमला मंदिर केस का इतिहास और वर्तमान स्थिति
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2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश का अधिकार दिया था।
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इसके खिलाफ रिव्यू अर्जी दाखिल की गई थी।
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केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 2018 के फैसले की समीक्षा का समर्थन किया।
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2020 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबरीमला मामले में दाखिल अर्जी पर 9 जजों की संवैधानिक बेंच सुनवाई करेगी।
फैसले का व्यापक महत्व
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2018 के फैसले में बहुमत ने कहा था कि धर्म जीवन शैली का हिस्सा है और यह जीवन और देवत्व से जुड़ा है।
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जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने अल्पमत में कहा था कि धार्मिक मामलों में तार्किक भाव लागू नहीं किया जा सकता।
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अब इस मामले की सुनवाई को व्यापक आयाम दिया गया है, और आने वाला फैसला धर्म से जुड़े अन्य मामलों के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
निष्कर्ष:
सबरीमला और अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश का मामला सिर्फ मंदिर या मस्जिद का नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकार और समानता का संवैधानिक मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
