Tuesday, February 17

जयपुर: कुत्तों की नसबंदी में रिश्वत का मामला, दो डॉक्टर और ऑपरेटर गिरफ्तार

जयपुर। राजधानी जयपुर में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के काम में लगे नगर निगम के दो डॉक्टरों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने 75 लाख रुपये के बिल को पास कराने के एवज में कुल 16 लाख रुपये की रिश्वत मांग रखी थी।

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घूस का खेल और रकम का बंटवारा
हेरिटेज निगम के डॉ. योगेश शर्मा ने बिल फॉरवर्ड करने के बदले 12 लाख रुपये की मांग की थी। उनका दावा था कि नसबंदी के बाद यूट्रस और टेस्टिकल्स की गणना में अड़ंगा डालने के अधिकार का वह हकदार हैं। वहीं, ग्रेटर निगम के डॉ. राकेश कलोरिया ने नवंबर-दिसंबर के बिलों के लिए 4 लाख रुपये की मांग रखी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने जनवरी से अपनी मासिक घूस 2 लाख से बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये करने का फरमान भी जारी किया था।

मोलभाव के बाद 15 लाख में हुआ सौदा
जब फर्म के मालिक ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो डॉक्टरों ने मोलभाव किया और राशि 15 लाख रुपये पर तय हुई। पहली किश्त के रूप में 4 लाख रुपये देने की योजना बनाई गई थी।

सी-स्कीम में बिछाया गया जाल और गिरफ्तारी
ACB ने बताया कि डॉक्टरों ने खुद पैसे लेने के बजाय कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र सिंह शेखावत को मोहरा बनाया। ऑपरेटर ने पीड़ित को पहले निगम कार्यालय बुलाया और बाद में लोकेशन बदलकर सी-स्कीम बुलाया। जैसे ही ऑपरेटर 4 लाख रुपये लेने पहुंचा, ACB की टीम ने उसे दबोच लिया। इसके बाद नगर निगम कार्यालय में बैठे दोनों डॉक्टरों को भी हिरासत में लिया गया।

25 दिन की गोपनीय योजना से करप्शन पर शिकंजा
पीड़ित ने लगभग 25 दिन पहले ACB में शिकायत दर्ज कराई थी। इस कार्रवाई से जयपुर नगर निगम में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के बजट में भ्रष्टाचार की बड़ी परतें उजागर हुई हैं।

इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि शहर में स्ट्रीट डॉग्स की समस्या के समाधान के लिए निर्धारित बजट में घूसखोरी और कमिशन का खेल कितना गंभीर हो सकता है।

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