
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के चारों पदाधिकारियों समेत पांच पीएचडी छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट (निष्कासित/निलंबित) किए जाने के बाद कैंपस में विरोध तेज हो गया है। छात्र संघ ने इसे प्रशासन की दमनकारी कार्रवाई बताते हुए निष्कासन आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। वहीं, जेएनयू टीचर्स असोसिएशन (JNUTA) ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए वाइस चांसलर के खिलाफ आवाज बुलंद की है।
क्यों की गई कार्रवाई?
जेएनयू प्रशासन ने इस सख्त कार्रवाई का कारण 21 नवंबर को डॉ. बी. आर. आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में हुई घटना को बताया है। विश्वविद्यालय का आरोप है कि उस दिन लाइब्रेरी में लगाए गए फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी आधारित एक्सेस गेट्स में तोड़फोड़ की गई, हिंसा हुई और पढ़ाई व प्रशासनिक कार्यों में बाधा पहुंचाई गई।
हालांकि छात्र संघ और संबंधित छात्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
5 छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए किया गया रस्टिकेट
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2 फरवरी को जेएनयूएसयू के चारों पदाधिकारियों—
प्रेजिडेंट अदिति मिश्रा
वाइस प्रेजिडेंट के. गोपिका
जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव
जॉइंट सेक्रेटरी दानिश अली
के साथ-साथ पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार को भी विंटर और मॉनसून सेमेस्टर 2026 के लिए रस्टिकेट कर दिया।
इन सभी पर कैंपस में प्रवेश पर रोक लगाई गई है। साथ ही, प्रशासन ने 10 दिनों के भीतर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश भी दिया है।
19 अन्य छात्रों पर भी जुर्माना
छात्रों का कहना है कि इस कार्रवाई के तहत प्रदर्शन में शामिल 19 अन्य छात्रों पर भी 19-19 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिससे विश्वविद्यालय में आक्रोश और बढ़ गया है।
छात्र संघ का आरोप- “हमने मुद्दे उठाए, इसलिए सजा दी गई”
जेएनयूएसयू के जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव ने कहा कि प्रशासन ने यह कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि छात्र संघ लगातार छात्रों के मुद्दों पर आवाज उठा रहा था। उन्होंने बताया कि छात्र लंबे समय से सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए मैग्नेटिक गेट्स और फेस रिकग्निशन कैमरों को लेकर विरोध कर रहे थे, जिसे छात्र निगरानी (सर्विलेंस) की कोशिश मानते हैं।
सुनील यादव ने यह भी कहा कि छात्र संघ ने प्राइवेटाइजेशन, अरावली संरक्षण, यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस पर रोक और रोहित वेमुला एक्ट की मांग को लेकर भी आंदोलन किया था।
कैंपस में देर रात बैठक, मशाल जुलूस निकाला
निलंबन आदेश के बाद जेएनयू कैंपस में देर रात विभिन्न छात्र संगठनों की बैठक हुई, जिसमें प्रशासन के फैसले के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। मंगलवार रात छात्रों ने कार्रवाई के विरोध में और यूजीसी इक्विटी रूल्स समेत अन्य मांगों को लेकर मशाल जुलूस भी निकाला।
JNUTA और JNUSU की मांग- आदेश तुरंत वापस हो
जेएनयू छात्र संघ और शिक्षक संगठन दोनों ने एक सुर में प्रशासन से मांग की है कि छात्रों को रस्टिकेट करने का आदेश तत्काल वापस लिया जाए, ताकि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल प्रभावित न हो।