लखनऊ, ब्यूरो।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। इस हलचल के केंद्र में हैं हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, जो राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद से हटने के बाद एक बार फिर सक्रिय राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। खास बात यह है कि उनकी सक्रियता सवर्ण, विशेषकर ब्राह्मण समाज को संगठित करने के इर्द-गिर्द केंद्रित नजर आ रही है।
यूजीसी के नए नियमों को लेकर जब भाजपा के अधिकांश सवर्ण नेता चुप्पी साधे रहे, तब कलराज मिश्र खुलकर सामने आए। उन्होंने न सिर्फ इन नियमों का विरोध किया, बल्कि इन्हें संविधान विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग भी की। उनके इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर दो बार राज्यपाल रह चुके कलराज मिश्र अब अचानक इतनी सक्रियता क्यों दिखा रहे हैं।
संगठन निर्माण से सियासी संकेत
राज्यपाल पद से हटने के तुरंत बाद नवंबर 2025 में कलराज मिश्र ने ‘विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद’ नाम से एक संगठन का गठन किया। इसके जरिए वे देश-विदेश में फैले ब्राह्मण समाज को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। दिसंबर 2025 में दिल्ली में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन ने इस पहल को और मजबूती दी। सम्मेलन में पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की मौजूदगी ने इस संगठन को राजनीतिक वजन भी दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि सवर्ण समाज को फिर से एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब भाजपा के परंपरागत सवर्ण वोट बैंक में असंतोष की चर्चाएं सामने आती रही हैं।
क्या है राजनीतिक महत्वाकांक्षा?
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कलराज मिश्र की कोई नई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है। लोकसभा का टिकट कटने के बाद उन्हें राज्यपाल बनाया गया था और तभी यह माना गया कि वे सक्रिय राजनीति से दूर हो जाएंगे। चुनावी राजनीति में उनकी वापसी की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन पार्टी के भीतर एक प्रभावशाली ब्राह्मण नेता के रूप में खुद को दोबारा स्थापित करने की कोशिश से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस चर्चा को और बल इस तथ्य से भी मिलता है कि उनके पुत्र अमित मिश्र प्रदेश भाजपा में सक्रिय सदस्य हैं। ऐसे में संगठन और बयानों के जरिए सियासी जमीन तैयार करने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
भाजपा में ब्राह्मण चेहरे की पुरानी पहचान
कलराज मिश्र यूपी भाजपा के बड़े चेहरों में गिने जाते रहे हैं। वे दो बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी, चिकित्सा शिक्षा तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं। 2014 में उन्होंने लोकसभा चुनाव भी जीता। इसके बाद उन्हें पहले हिमाचल प्रदेश और फिर राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया।
अब राज्यपाल पद से मुक्त होने के बाद जिस तरह वे ब्राह्मण सम्मेलनों, संगठन निर्माण और यूजीसी जैसे मुद्दों पर मुखर हो रहे हैं, उसने यह साफ कर दिया है कि कलराज मिश्र फिलहाल राजनीति के हाशिये पर नहीं रहना चाहते।
सियासी हलकों में बढ़ी चर्चा
नोएडा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूजीसी नियमों को संविधान के खिलाफ बताकर उन्होंने साफ संदेश दिया कि वे सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बोलेंगे। उनका यह रुख आने वाले समय में भाजपा की आंतरिक राजनीति और सवर्ण समीकरणों को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।