Friday, January 30

भारत–यूरोपीय संघ मोबिलिटी समझौता: लाखों भारतीय छात्रों और कामगारों के लिए खुले नए अवसर

 

This slideshow requires JavaScript.

 

ब्रसेल्स/नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच इस सप्ताह हुए मोबिलिटी फ्रेमवर्क समझौते से भारतीय छात्रों, कामगारों और पेशेवरों के लिए यूरोप के 27 देशों में शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। यह समझौता मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत–EU शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो दा कोस्टा की मौजूदगी में संपन्न हुआ।

 

यह करार ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में H-1B वीजा नियम सख्त और महंगे हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ यह समझौता विदेश जाने के इच्छुक भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

 

भारतीय छात्रों के लिए असीमित अवसर

 

नए मोबिलिटी फ्रेमवर्क के तहत यूरोपीय संघ ने भारतीय छात्रों के लिए आवाजाही पर किसी भी प्रकार की सीमा नहीं रखने का आश्वासन दिया है। इससे यूरोप में पढ़ाई, रिसर्च और काम करने के इच्छुक भारतीयों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

 

वर्तमान में यूरोपीय संघ के देशों में करीब 1.20 लाख भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से लगभग 50 हजार छात्र अकेले जर्मनी में हैं, जिससे भारतीय छात्र वहां का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार, 8 लाख से अधिक भारतीय नागरिक यूरोपीय संघ के देशों में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

 

वर्कफोर्स संकट से जूझ रहे यूरोप को मिलेगा समाधान

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता भारत और यूरोप—दोनों के लिए फायदेमंद है। जहां भारत के पास बड़ी युवा आबादी है, वहीं यूरोप घटती कार्यशील जनसंख्या की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में यह समझौता भारतीय इंजीनियरों, केयर वर्कर्स, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों, ड्राइवरों और रिसर्चर्स के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।

 

विशेषज्ञों की राय

 

रणनीतिक सलाहकार रितेश जैन का कहना है कि इस समझौते से पूरे यूरोप में भारतीय कामगारों के लिए फ्री मूवमेंट के दरवाजे खुल गए हैं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय विश्वविद्यालय अब भारतीय छात्रों के लिए ज्यादा सुलभ होंगे, जहां पढ़ाई का खर्च अमेरिका और ब्रिटेन की तुलना में काफी कम है।

 

NRI रेमिटेंस में बढ़ोतरी की उम्मीद

 

रितेश जैन के मुताबिक, पश्चिमी देशों में घटती आबादी का सीधा लाभ भारत जैसे युवा देशों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारतीयों को विदेशों में ज्यादा रोजगार मिलेगा, जिससे भारत में एनआरआई से आने वाला पैसा (रेमिटेंस) भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–EU मोबिलिटी समझौता न केवल भारतीय युवाओं के वैश्विक अवसर बढ़ाएगा, बल्कि दोनों क्षेत्रों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा।

 

 

Leave a Reply