
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े चार्टर्ड विमान हादसे की जांच में अहम प्रगति हुई है। बारामती एयरपोर्ट के पास 28 जनवरी को हुए लीयरजेट-45 विमान हादसे के घटनास्थल से विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे दुर्घटना से पहले के अंतिम क्षणों, पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के बीच हुई बातचीत तथा हादसे की पूरी श्रृंखला से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
यह चार्टर्ड विमान वीएसआर वेंचर्स कंपनी का था, जो रनवे के करीब दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दुर्घटना के समय मौसम साफ, दृश्यता लगभग 3,000 मीटर और हवा शांत बताई जा रही है। इसके बावजूद विमान रनवे से क्यों चूक गया, इसकी जांच की जा रही है।
जांच के लिए दो टीमें गठित
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने मामले की जांच के लिए तीन-तीन अधिकारियों की दो अलग-अलग टीमें गठित की हैं। दोनों टीमों ने 28 जनवरी को ही क्रैश साइट का दौरा किया और मौके से कई अहम साक्ष्य एकत्र किए। फोरेंसिक टीम ने भी ईंधन सहित विभिन्न नमूने जांच के लिए जुटाए हैं। घटनास्थल पर एएआईबी के महानिदेशक जीवीजी युगंधर भी मौजूद रहे।
नागर विमानन मंत्रालय ने कहा है कि जांच पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी सवाल उठाया है कि इसी कंपनी के वर्ष 2023 में मुंबई में हुए एक अन्य विमान हादसे की जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
रनवे की स्थिति भी जांच के दायरे में
हादसे के बाद बारामती एयरपोर्ट के रनवे नंबर-11 की स्थिति भी सवालों के घेरे में आ गई है। एविएशन विशेषज्ञ अमित सिंह के अनुसार, जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि रनवे का अंतिम बार रखरखाव कब किया गया था। रनवे की थ्रेशहोल्ड मार्किंग के फीके पड़ने और सतह से बजरी निकलने की तस्वीरें सामने आई हैं। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि रनवे आसपास के मैदान से अधिक ऊंचाई पर क्यों बनाया गया।
पायलटों और इंजीनियर की भूमिका की भी होगी जांच
जांच एजेंसियां विमान उड़ा रहे दोनों पायलटों और उड़ान के लिए एनओसी देने वाले इंजीनियर के रिकॉर्ड की भी समीक्षा करेंगी। इसमें उनके आराम का समय, छुट्टियां, कार्यभार और मानसिक स्थिति जैसे पहलुओं की जांच शामिल होगी। यह भी देखा जाएगा कि क्या कंपनी की ओर से पायलटों को निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त विश्राम दिया जा रहा था।
डीजीसीए की सेफ्टी ऑडिट पर भी सवाल
लगातार सामने आ रही विमानन घटनाओं के बीच यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या डीजीसीए बड़ी एयरलाइंस के साथ-साथ चार्टर्ड और बिजनेस जेट सेवाएं देने वाली कंपनियों का सुरक्षा ऑडिट प्रभावी ढंग से कर पा रहा है। सूत्रों के अनुसार, तेजी से बढ़ते भारतीय विमानन क्षेत्र में छोटी एयरलाइंस और चार्टर्ड सेवाओं की गहन सुरक्षा जांच भी बेहद जरूरी हो गई है।