Friday, January 30

समृद्धि यात्रा से नीतीश का विकास दांव ‘जंगलराज’ की याद दिलाकर राजद के गढ़ में साधा सियासी निशाना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा जब समस्तीपुर पहुंची, तो यह महज एक विकास समीक्षा कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसमें विकास के वादों और राजनीतिक हमलों का स्पष्ट मेल देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मजबूत माने जाने वाले इलाकों में नीतीश कुमार ने अपनी सधी हुई चाणक्य नीति’ के तहत दोहरे हथियार का इस्तेमाल किया—एक ओर विकास की उपलब्धियों का बखान, तो दूसरी ओर पुराने जंगलराज’ की याद दिलाकर विपक्ष पर तीखा हमला।

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विकास योजनाओं की बरसात, करोड़ों की सौगात

समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने समस्तीपुर जिले को 827 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी। इस दौरान 470 करोड़ रुपये की लागत से 71 योजनाओं का शिलान्यास किया गया। इसके अलावा

  • 02 करोड़ रुपये की लागत से 74 योजनाओं का
  • 29 करोड़ रुपये की लागत से 43 योजनाओं का
    कार्यारंभ भी कराया गया।

मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके। उन्होंने वर्ष 2005 से अब तक के अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किस तरह बदलाव आया है। अपने संबोधन में उन्होंने आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए किए गए फैसलों और योजनाओं को भी विशेष रूप से रेखांकित किया।

‘लालू-राबड़ी राज’ पर तीखा प्रहार

विकास के साथ-साथ नीतीश कुमार ने अपने भाषण में राजद शासनकाल पर भी खुलकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी राज की याद है ना? शाम होते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। समाज में अराजकता थी, पढ़ाई-लिखाई ठप थी, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी और सड़कें बदहाल थीं।”

उन्होंने परिवारवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद से हटे तो अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। उस दौर में आम जनता के लिए कुछ किया गया और ही महिलाओं के लिए।”

राजद का अभेद किला अब भी चुनौती

हालांकि, समस्तीपुर जिले की कुछ विधानसभा सीटें अब भी राजद के मजबूत गढ़ के रूप में कायम हैं। उजियारपुर विधानसभा सीट से राजद के आलोक मेहता लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं। वर्ष 2015 से लेकर 2025 तक एनडीए के तमाम प्रयासों के बावजूद यह सीट राजद के हाथ से नहीं निकली।

इसी तरह मोरवा विधानसभा सीट पर भी वर्ष 2020 और 2025 में राजद के रणविजय साहू ने अपनी पकड़ बनाए रखी। वहीं विभूतिपुर सीट पर महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हुए सीपीआई (एमएल) के अजय कुमार ने जदयू की सीट छीन ली, जिसे बाद के चुनावों में भी एनडीए वापस हासिल नहीं कर सका।

सियासी संदेश साफ

समृद्धि यात्रा के जरिए नीतीश कुमार ने यह साफ संदेश देने की कोशिश की कि विकास ही उनका मुख्य एजेंडा है, लेकिन चुनावी रण में जंगलराज की याद दिलाना भी उनकी रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा। राजद के गढ़ में विकास योजनाओं की घोषणा और पुराने दौर की यादें—दोनों को साथ रखकर नीतीश कुमार ने आने वाले राजनीतिक संघर्ष की दिशा भी तय कर दी है।

 

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